वेताल -वाणी,दिवाली तो दौलत वालों की है ,हम फाँकामस्तों की क्या खाक दिवाली है

2047 में विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर भारत में अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को स्पष्ट दिखाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार दीवाली आ रही है ।कोई लाई बताशा से अपना मुंह मीठा करेगा तो कोई रस मलाई के मजे लूटेगा ,कोई नये ब्रांडेड कपड़े पहनेगा तो कोई पुराने कपड़े से ही काम चला लेगा।किसी के घर बिजली के झालरों से चमकेंगे ,दमकेंगे तो किसी के घर में मिटटी के दिये या मोमबत्ती की रौशनी रहेगी ,किसी के घर पकवानों की खुशबू महकेगी तो किसी को मुश्किल से एक जून का खाना ही नसीब होगा ,किसी के बच्चे जमकर आतिशबाजी करेंगे तो कुछ बच्चे सड़कों पर अधजले ,अधफुटे, फिस्स हो गये फटाकों की और लपकेंगे ,असमताओं ,और विषमताओं की सूची काफी लंबी है ,किस किस असमानताओं का उल्लेख करूँ ,। रौशनी का यह त्यौहार गरीबी के अंधेरे के बीच ख़ुशी ख़ुशी मनाएंगे ।पूंजीवाद का राक्षस अपनी सफलता पर जोर से अट्टाहास करता हुआ दिखाई देगा । इसीलिए कहता हूं कि* दीवाली तो दौलतवालों की है ,हम फाँकामस्तों की क्या खाक दीवाली है *


