बिहान योजना से बदली कुमुद बाई की जिंदगी, मुर्गीपालन और गौपालन से बनी आत्मनिर्भर

रायगढ़, 13 मार्च 2026/ कभी घर की चार दीवारी तक सीमित रहने वाली धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम बांझीआमा की श्रीमती कुमुद बाई आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। शासन की महत्वाकांक्षी बिहान योजना ने उनके जीवन को नई दिशा और नया आत्मविश्वास दिया है। कुमुद बाई सूरज महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। शुरुआत में वे कम पढ़ी-लिखी होने के कारण झिझकती थीं, लेकिन समूह की बैठकों और गतिविधियों में शामिल होते-होते उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा। धीरे-धीरे उन्होंने घर की चौखट पार कर समाज और समूह के साथ कदम मिलाकर चलना शुरू किया। आज वे न केवल स्वयं बैंक जाकर अपने काम पूरे कर लेती हैं, बल्कि समूह की अन्य महिलाओं को भी बैंक से जुड़े कार्यों में मदद करती हैं।
स्व-सहायता समूह में नियमित बचत और आपसी सहयोग ने कुमुद बाई को आर्थिक रूप से मजबूत बनने की राह दिखाई। उन्होंने 70 हजार रुपये का ऋण लेकर मुर्गीपालन का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने लगभग 40 हजार रुपये की लागत से अंडों से चूजे निकालने वाली मशीन खरीदी। इस मशीन में एक बार में करीब 60 अंडे रखे जा सकते हैं, जिनसे निर्धारित समय के बाद चूजे निकलते हैं। इससे उनकी आय में धीरे-धीरे वृद्धि होने लगी और उनके हौसले को नई उड़ान मिली। अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कुमुद बाई ने अपनी आजीविका को और मजबूत करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने एक निजी बैंक से 1 लाख 50 हजार रुपये का ऋण लेकर अच्छी नस्ल की गाय खरीदी। यह गाय प्रतिदिन लगभग 10 से 12 लीटर दूध देती है, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त होने लगी है।
आज कुमुद बाई मुर्गीपालन, गौपालन और खेती जैसे कार्यों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही हैं। वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं। कुमुद बाई कहती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और नई उम्मीद जगी है। घर से निकलकर बैंक तक पहुंचने और स्वयं का रोजगार खड़ा करने तक का यह सफर उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन बिहान के सहयोग और मार्गदर्शन ने इसे संभव बना दिया। आज कुमुद बाई अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।



