आ रहा है रायगढ़ में जनसुनवाई का मौसम ,जून और जुलाई में अडानी के पावर प्लांट और रायगढ़ इस्पात के विस्तार सहित होगी चार जनसुनवाई ,लेकिन इससे पहले विकास के देवदूतों इतनी सी विनती सुन लो

रायगढ़ । विकास की कीमत विनाश से चुकानी पड़ती है इसे चुकाते -चुकाते अब मेरा शहर बुरी तरह
से थक चुका है ,अब इस तरह का विकास नहीं चाहिए जिसमें प्रदूषण ,जीना दूभर कर दे ,सड़कें लहू चाटती रहें ,पक्षियों का कलरव न सुनाई पड़े ,वन्य प्राणी जंगल ही छोड़ दें ,जंगल ही गायब होते चले जाएं ,नदियां ,नाले ,तालाब ही सुख जाए ,भूजल रसातल में चले जाएं ,साल में दस माह सिर्फ गर्मी ही पड़े ,सड़कों के ऊपर जाम लगे और कीड़े मकोड़े की तरह रेंगना पड़े ,
हमें इस तरह का भी विकास नहीं चाहिए कि हमें कांक्रीट के जंगलों के बीच रहना पड़े ,हम इंसानों के बीच रहना चाहते है नाकि मशीनी मानव के बीच जो सिर्फ भागता हुआ नजर आए ।
विकास के देवदूतों यदि तुम सचमुच में विकास करना चाहते हो तो मेरे शहर की आबोहवा को पहले के जैसा कर दो ताकि शुद्ध हवा में सांस ले सके,मां बाप बगैर किसी चिंता के अपने बच्चे के सही सलामत लौटने का इंतजार कर सकें ,पहले की तरह सड़कों के ऊपर निर्बाध रूप से चल सकें ,आराम के साथ पीने का शुध्द पानी मिल सके , पहले की तरह नदी ,नाले ,तालाब में जलक्रीड़ा ,स्नान ध्यान कर सकें ,कहने को तो बहुत कुछ है पर इतना ही कर दो ,विकास के देवदूतों हम तुम्हे दिल से दुआ देंगे।
विकास के देवदूतों से कोई चांद और सितारे तो नहीं मांग रहा हूँ ,बस इतना ही मांग रहा हूँ कि वो मेरे शहर के चैन और सकून वाले पुराने दिन लौटा दे।
आज जो हम 46 से 47 डिग्री का ताप जो झेल रहे हैं ,एक एक बूंद पानी को जो तरस रहे हैं ,हवा में घुली उड़न -राख (फ्लाई एश )को जो सांस के साथ खींच रहे हैं ,सड़क पर दौड़ते दैत्यों की चपेट में आकर जिनका लहू सड़क को लाल कर रहा है ,जिनका घर बार ,खेत खरिहान उजड़ रहा है ,। ये लोग ही दरअसल में विकास की कीमत अपने विनाश से चुका रहे हैं ।इस विकास से जिनकी तिजोरियां भर रही हैं उन्होंने इन समस्यायों को अनदेखा कर अपने आंखों पर पट्टी बांध रखी है ।ये अलग बात है कि जो इन समस्यायों को लेकर सवाल करता है उन्हें ये लोग ,इनके कारिंदे तत्काल विकास विरोधी का तमगा देने में देर नहीं लगाते है ,इनके ऊपर फर्जी पुलिस प्रकरण दर्ज कराना तो इनके बाएं हाथ का खेल होता है ।
1990 के बाद से तो छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला इस तरह की घटनाओं का साक्षी रहा है ,इसका सीना छलनी किये जाने का दौर बदस्तूर जारी है।



