बेतालवाणी
आसमान से गिरती फ्लाई ऐश ने छत पर सोने का भी सुख छीन लिया ,उस दिन जब घण्टों बिजली गुल थी- —

उस दिन जब घण्टों ,
बिजली गुल थी
तब याद आ रहे थे
वो गुजरे पुराने दिन
वह भी एक समय ही तो था
जब गर्मियों के मौसम में
हम खटिया बिछाकर घर के
बाहर सोया करते थे
मच्छरों के भन-भन के बीच
आसमान में चांद और सितारों को
जी भरकर निहारा करते थे
इस बीच गर थोड़ी हवा भी चलती
तो वो सुकून का अहसास कराती थी
करवट बदलते बदलते नींद आ ही जाती थी।
भौतिक सुविधाओं ने गर्मियों में बाहर सोने का
सुख हमसे छीन लिया ,
आसमान से गिरती फ्लाई ऐश ने
छत पर भी सोने का सुख छीन लिया
अब तो बगैर पंखा ,कूलर ,एसी के नींद कहाँ आती है
गर्मियों में घर से बाहर सोने की याद बहुत आती है।(अनिल)



