मोदी के नेतृत्व में एनडीए अपना कार्यकाल निष्कंटक पूरा करेगी ? लेकिन इससे पहले महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर रहेगी सबकी नजर

प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बगैर किसी व्यवधान के अपने 5 साल के कार्यकाल को पूरा करेगी फिलहाल तो ऐसा ही नजर आ रहा है ।
प्रधानमंत्री मोदी अपनी सत्ता जैसे चलाते आये हैं वैसी ही चलाएंगे ,वो किसी भी दबाव में नहीं आने वाले हैं।लेकिन सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना उनके समक्ष एक चुनोती जरूर है क्योंकि ऐसी परिस्थिति उनके सामने पहली बार आई है । मंत्रिमंडल के गठन औऱ सभी प्रमुख मंत्रालय भाजपा के पास रखकर उंन्होने अपने दबदबे का परिचय जरूर दे दिया है और पहली चुनोती को सफलतापूर्वक पार किया है।
स्थिर सरकार के लिए मोदी का नेतृत्व भी जरूरी है इसी के चलते तेलगुदेशम और जदयू का समर्थन भी उनको मिलता रहेगा और समर्थन इनके द्वारा तबतक दिया जाता रहेगा जबतक कि इनकी सरकार या पार्टी पर कोई आँच न आये।
दूसरी तरफ भविष्य में तेलगुदेशम और जदयू के इंडिया गठबंधन में जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता क्योंकि इस गठबंधन में सीटों की संख्या के आधार इनकी पार्टी का स्थान चौथा औऱ पांचवां रहेगा जबकि एनडीए में इनका स्थान दूसरा औऱ तीसरा है ।
राजनीति सम्भावनाओं तथा अवसरवादिता का खेल है और यहां पर ना कोई किसी का स्थायी मित्र या शत्रु होता ।इसलिए भविष्य में क्या जोड़ तोड़ हो सकता है फिलहाल उसपर कुछ कहा नही जा सकता है।
अगले कुछ माह के अंदर महाराष्ट्र ,हरियाणा और झारखंड में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं ।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में इन तीनों राज्यों में भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ सीटों के बंटवारे पर तालमेल बैठाकर कैसा प्रदर्शन प्रदर्शन करती है उसपर सभी की निगाह टिकी रहेगी ।विशेष तौर पर महाराष्ट्र में जहां पर शिवसेना (शिंदे)और एनसीपी (अजित पवार) ,मनसे (राजठाकरे) भाजपा के प्रमुख सहयोगी दल हैं ।भाजपा का यह यह महायुति गठबंधन यदि महाराष्ट्र में सरकार बनाने में सफल हो गया तो एनडीए के अंदर सहयोगी दलों के बीच भाजपा तथा मोदी की स्थिति और भी मजबूत होगी ।



