फ्लाई ऐश का गढ़ बन गया है रायगढ़ जाएं तो जाएं कहाँ ? दूसरा कोई चारा नहीं ,मजबूरी बन गया है फ्लाई ऐश के साथ जीना

रायगढ़ । कोल बेस उद्योगों की भरमार के कारण रायगढ़ फ्लाई ऐश का गढ़ बन गया है ।फ्लैश ऐश के पूरे सौ प्रतिशत निबटान का कारगर तरीका नहीं खोजा गया और ठोस उपाय नहीं गए तो फ्लाई ऐश की समस्या बहुत विकराल रूप में सामने आएगी । जुर्माना से यह समस्या दूर होने वाली नहीं है।
फ्लाई ऐश के निबटान के लिए वर्तमान में फ्लाई ऐश से ईंट बनाई जा रही है तो उसमें पोजलोना गुण होने के कारण सीमेंट बनाने में उसका प्रयोग किया जा रहा है ।कहीं पर लैंड फील करने में भी फ्लाई ऐश का प्रयोग किया जाता है ।
फ्लाई ऐश का प्रयोग सड़क का डामरीकरण करने और कॉन्क्रीट बनाने में रेत के विकल्प के रूप में किये जाने पर शोध कार्य किया जाना चाहिए ।यदि फ्लाई ऐश के सौ प्रतिशत निबटान के उपाय नहीं ढूंढे गए तो फिर राखड़ के पहाड़ खड़े होते जाएंगे राखड़ बांध भी लबालब होते जाएंगे ।फ्लाई ऐश का उत्पादन करने वाले भी जुर्माने से बचने के लिए कागज पर फर्जी निबटान दिखाते हुए पाए जाएंगे ।हमारे देश के कोयले में राख अधिक निकला करती है लेकिन आस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के कोयले में राख कम निकलती है लेकिन आयात करने के कारण यह कोयला काफी महंगा पड़ा करता है ।
देश में ऊर्जा के वैकल्पिक साधन कोयला की तुलना में और जरूरत की तुलना में कम है इसलिए हमारी मजबूरी भी कोयला है और कोयला जलेगा तो राख भी निकलेगी ,समस्या बड़ी है लेकिन समाधान के उपाय भी कम हैं ।



