बेतालवाणी

नौ पड़े या छै कांग्रेस को अपना वजूद कायम रखने , साहसिक कदम उठाने होंगे

वीर भोग्या वसुंधरा ,जो जोखिम उठाता है वही लाभ प्राप्त करता है ।राजनीति में भी ऐसा कुछ होता है ।भाजपा और मोदी जी ने भी ऐसा किया और राजस्थान ,मध्यप्रदेश ,तथा छत्तीसगढ़ ये तीनों राज्य उसकी झोली में गिर गए ।इन तीनों राज्यों में भाजपा ने मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया था और चुनाव मोदी जी के चेहरे पर लड़ा गया था जिसके ही कारण इन तीनों राज्यों में आश्चर्यचकित कर देने वाले निर्णय करते हुए मुख्यमंत्री घोषित किये गए और किसी ने चूं चपड़ तक नहीं की ।


इंदिरा गांधी भी ऐसे चोंकाने वाले निर्णय किया करती थी और जिसे चाहे मुख्यमंत्री बना देती थी और जिसे चाहे उसे हटा दिया करती थी ।उन्हें यूं ही नहीं आयरन लेडी कहा जाता था ।आज की कांग्रेस की बात करें तो उसके पास साहसिक निर्णय लेने की ताकत और क्षमता नहीं है इसलिए वो समझौतावादी रास्ते पर चला करती है ।यदि समय रहते कांग्रेस ने इन तीनों राज्यों में साहसिक निर्णय लिए होते तो हो सकता था कि तस्वीर कुछ दूसरी होती ।राहुलगांधी में साहसिक निर्णय लेने की क्षमता है जिसका प्रदर्शन भी उंन्होने कई बार किया है पर वो अपने इरादे में पूरी तरह से सफल नही हो सके हैं ।
चुनाव हार जाने ,पार्टी में बगावत हो जाने की आशंका बताकर सम्भवतः राहुल गांधी को साहसिक राजनैतिक कदम उठाने से रोक दिया जाता है । अब वह समय आ गया है कि 9 पड़े या 6 कांग्रेस को कड़े और साहसिक कदम उठाने होंगे अन्यथा 2024 में लोकसभा के चुनाव में भाजपा 400 पार मिलेगी ,इसमें कोई अंदेशा दिखाई नहीं देता है ।
कांग्रेस राजस्थान ,मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में 40%वोट मिलने को अपनी ताकत मान रही है लेकिन भाजपा लोकसभा के चुनाव में इन्हीं राज्यों में 50%से अधिक वोटों का आंकड़ा पार करते हुए दिखाई देगी ।

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