तीसरी और चौथी रेल लाने बिछने के बाद भी नही सुधरी ट्रेन की चाल , घंटों विलम्ब से ट्रेन पहुँच रही रायगढ़ , त्योहारी सीजन में यात्री ट्रेनों की बजाय मालगाड़ियों को प्राथमिकता दे रहा रेलवे

रायगढ़. बिलासपुर से रायगढ़ और झारसुगुड़ा तक रेलवे की तीसरी और चौथी लाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है। रेलवे का दावा था कि चौथी लाइन का काम पूरा होने के बाद यात्रियों को अच्छी सुविधा मिलेगी और ट्रेनों की रफ्तार भी बढ़ेगी मगर ऐसा नहीं हो सका है। थर्ड और फोर्थ लाइन का काम कम्प्लीट होने के बाद भी ट्रेनों की चाल नहीं सुधर रही है बल्कि अब तो पहले से भी ज्यादा स्थिति बिगड़ गयी है। अधिकांश ट्रेनें घंटों विलंब से पहुंच रही है। ऐसे में इस त्यौहारी सीजन में यात्रियों की परेशानी बढ़ गयी है क्योंकि रेलवे की पहली प्राथमिकता अब यात्री नहीं मालगाड़ी बन गयी है।
रेलवे द्वारा पहले रायगढ़ में चांपा से लेकर झारसुगुड़ा तक तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था। इस दौरान रेलवे द्वारा दावा किया गया था कि तीसरी लाइन के बिछने के बाद रेल यातायात में काफी सुविधा मिलेगी। इससे न सिर्फ ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी बल्कि ट्रेनों की स्पीड भी बढ़ जायेगी जिससे यात्रियों को अपनी मंजिल तक पहुंचने में और आसानी होगी। तीसरी लाइन का काम पूरा होने के बाद बिलासपुर से झारसुगुड़ा तक चौथी लाइन बिछाने का काम प्रारंभ किया गया। इस दौरान भी वही सब दावे किये गये। पिछले दिनों चौथी लाइन के कनेक्टिविटी के लिए ही दर्जनों पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया। उस समय भी यह ढिंढोरा पीटा गया कि 15 सितंबर के बाद स्थिति सामान्य हो जायेगी और यात्रियों को राहत मिलेगी मगर फोर्थ लाइन कनेक्टिविटी के बाद भी न तो ट्रेनों की चाल सुधर सकी है और न यात्रियों को राहत मिल सकी है। खासकर बिलासपुर से लेकर रायगढ़ तक का सफर यात्रियों के लिए काफी कष्टदायक साबित हो रहा है।
दरअसल, तीसरी और चौथी लाइन का काम पूरा होने के बाद भी बिलासपुर और रायगढ़ के बीच एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को बीच-बीच में रोक दिया जा रहा है। किसी ट्रेन को आउटर में खड़े दिया जाता है तो किसी को बेवजह बीच रास्ते में…। गत गुरूवार की ही बात करें तो इस रूट में आधा दर्जन से अधिक ट्रेनें घंटों विलंब से चली। मेल एक्सप्रेस 3 घंटे, अहमदाबाद साढ़े 3 घंटे तो आजाद हिन्द छह घंटे तो और समरसता एक्सप्रेस 3 घंटे विलंब से यहां पहुंची। शुक्रवार को भी ट्रेनों की चाल कुछ इसी तरह की बनी रही जिसके चलते रेलव स्टेशन में बैठे यात्री हलाकान और परेशान होते रहे।
रेलवे के अनुसार तीसरी और चौथी लाइन का काम पूरा होने के बाद तीसरी लाइन में यात्री ट्रेनों को दौड़ाया जा रहा है तो चौथी लाइन में मालगाड़ियों का परिचालन किया जा रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि रेलवे अब भी पटरियों में पहली प्राथमिकता मालगाड़ियों को दे रही है और उसके बाद ही यात्री ट्रेनों को छोड़ रही है। मालगाड़ियों को पास कराने के लिए ही पैसेंजर से लेकर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेनों को रोक दिया जा रहा है और इसी के चलते इनकी चाल बिगड़ रही है और ट्रेनों की लेटलतीफी का सिलसिला बदस्तूर जारी है।



