बिहार में प्रथम चरण में 65.08% वोटिंग,14 नवम्बर को मतगणना के बाद टूटेगा रिकॉर्डतोड़ मतदान का तिलिस्म,तब तक अपनी ढपली अपना राग

बिहार के प्रथम चरण में आजादी के बाद से लेकर अबतक के ताबड़तोड़ मतदान ने चुनावी पंडितों के होश उड़ा दिए हैं कोई भी यह स्पष्ट तौर बताने की स्थिति में नहीं है कि भारी मतदान क्यों हुआ और इसका क्या परिणाम आएगा ?कोई इसे प्रो इन कंबेंसी बता रहा है तो कोई 20 साल की एंटी इन कंबेंसी बता रहा है तो कोई इसे महिलाओं को दस हजार रुपया देना कह रहा है तो कोई छठ के अवसर पर घर आये प्रवासियों द्वारा मतदान किया जाना बता रहा है तो कोई नौकरी और बेरोजगारी को गिना रहा है ,इस सबसे अलग जाति और धर्म की बात हो रही तो कोई इसे पीके का इफेक्ट बता रहा है ,तो कोई नीतीश की उपलब्धि को इसका कारण बता रहा है ।कहने का मतलब यह है सब अपनी अपनी ढपली पीट रहे हैं और अपना अपना राग सुना रहे है ।सभी की नजर दूसरे चरण के मतदान पर लगी हैं और इंतजार कर रहें हैं कि दूसरे चरण में मतदान का क्या ट्रेंड रहता है ।
तटस्थ चुनावी प्रेक्षक बार इस बार चुनावी भविष्यवाणी से दूर रहकर जो हो रहा है उसे देख रहे हैं कुछ कुछ बुझ रहे हैं क्योंकि बिहार की राजनीति की जो थोड़ी बहुत समझ रखते हैं वो साफ साफ बोलने से बच भी रहे हैं जिससे ऐसा महसूस होता है कि इस बार चुनावी परिणाम पूर्व के सभी नतीजों से अप्रत्याशित हो सकता है ?।इस सबके बावजूद 14 नवम्बर को मतगणना के नतीजे का इंतजार करना ही बेहतर होगा जिसके साथ ही नतीजे सामने आ जाएंगे और इसी के साथ भारी मतदान का तिलिस्म भी टूट जाएगा ।
यहां हम यह बताते चलते हैं कि बिहार के प्रथम चरण के मतदान का चुनाव आयोग ने नया डेटा जारी करते हुए वोटिंग प्रतिशत 65.08%बताया है। 11 नवम्बर को दूसरे चरण का मतदान होगा जबकि पहले चरण में 121 सीटों के लिए मतदान हुआ था ।



