सिन्दूर लगाकर बंग समाज की महिलाओं ने की दुर्गा माता की विदाई,एक दूसरे को भी सिंदूर लगाया

रायगढ़ 2 अक्टूबर ।सिंदूर खेला..जिसका शाब्दिक अर्थ है सिंदूर का खेल, यह एक बंगाली हिंदू परंपरा है जिसमें महिलाएं विजयादशमी यानी दुर्गा पूजा के अंतिम दिन एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। विजयादशमी के दिन अनुष्ठान पूजा के समापन के बाद बंगाली हिंदू महिलाएं देवी के माथे और चरणों पर सिंदूर लगाती हैं और उन्हें मिठाई अर्पित करती हैं। इस तरह सिन्दूर खेला के जरिये नौ दिन के बाद मां दुर्गा को मायके से विदाई की जाती है। हर नवरात्रि में रायगढ़ के मिलनी क्लब कालीबाड़ी और रेलवे दुर्गा पंडाल में बंगाली समाज की महिलायें ये पूरे भक्ति और उमंग से इस परंपरा का निर्वहन करती हैं।
नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्र का पावन पर्व दशमी तिथि को दशहरे के साथ ही खत्म हो जाता है। 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना के बाद दशमी पर इस पर्व का समापन होता है। देशभर में नवदुर्गा और दशहरे के पर्व को अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। देश भर में इस त्योहारों की धूम देखने को मिलती है, लेकिन बंगाली समाज में इसको लेकर एक अलग ही परंपरा है। नवरात्रि के दशमी तिथि को बंगाली समुदाय के लोग मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ाते हैं। साथ ही मां रानी के पंडालों में मौजूद लोग एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर दुर्गा पूजा की शुभकामनाएं देते हैं। इस रस्म के दौरान महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और धूमधाम से दुर्गा पूजा का समापन करती हैं। इसी परंपरा को सिंदूर खेला के नाम से जाना जाता है। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि पर शहर के मिलनी क्लब काली बाड़ी और रेलवे क्षेत्र में स्थापित दुर्गा पंडाल में बंगाली समाज द्वारा दशमी तिथि को माता की उपासना करते हुए पूरे खुशनुमा माहौल में सिन्दूर खेला की परपंरा का निर्वाह किया गया।

बंगाली समाज में ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा 10 दिनों के लिए अपने मायके आती हैं और इसी उपलक्ष्य में उनके स्वागत के लिए बड़े-बड़े पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है। बंगाली समुदाय में दुर्गा पूजा पंचमी तिथि से शुरू होती है ,जिसका अंत दशमी तिथि के दिन सिंदूर की होली खेल कर किया जाता है। इस दिन सिंदूर की होली खेल कर मां दुर्गा को विदा किया जाता है, इसलिए बंगाली समुदाय में इसे सिंदूर खेला के नाम से जानते हैं।



