लोक संगीत को जब शास्त्र से जोड़ा गया तब शास्त्रीय संगीत बना: डॉ लवली शर्मा,रायगढ़ में संगीत विश्व विद्यालय ना होना हैरत की बात

रायगढ़। 40 वें चक्रधर समारोह में सितार वादन की प्रस्तुति देने पहुंची इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की कुलपति प्रोफेसर डॉ. लवली शर्मा ने आज प्रेस से बातचीत की. उन्होंने कहा कि भारत शास्त्रीय संगीत की जननी है. शास्त्रीय संगीत लोक संगीत को शास्त्र से जोड़ती है. उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि संगीत का इतना बड़ा घराना होने के बावजूद रायगढ़ में अब तक संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं हो सकी है, जबकि यहां की ख्याति विदेशों तक फैली हुई हैं.
रायगढ़ में आयोजित गीत, संगीत, नृत्य, सुर और ताल के संगीतिक मंच, ऐतिहासिक चक्रधर समारोह के चौथे दिन सितार वादन की प्रस्तुति देने पहुंची डॉ लवली शर्मा वर्तमान में इंदिरा कला संगीत विश्व विद्यालय खैरागढ़ में कुलपति के पद पर पदस्थ हैं और संगीत कला की अलख जगा रही हैं, चक्रधर समारोह में अपनी प्रस्तुति देने से पहले वे प्रेस और मीडिया से मुख़ातिब हुई, उन्होंने कहा कि संगीत की साधना करना आसान नहीं है, संगीत को समझने और समझाने में समय लगता है, शास्त्रीय संगीत लोक संगीत को शास्त्र से जोड़ती है. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने लगातार प्रयास किया जा रहा है, खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय में बच्चों के लिए वर्कशॉप का आयोजन भी किया जा रहा है और ख़ास बात यह देखी जा रही है है इस वर्कशॉप को लेकर बच्चों के साथ उनके पालकों में भी उत्साह नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि रायगढ़ घराना संगीत की एक बड़ी विरासत है, यहां आयोजित होने वाले चक्रधर समारोह की ख्याति विदेशों तक फैली हुई है इसके बावजूद यहां अब तक संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना न हो पाना काफ़ी आश्चर्य का विषय है. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि रियालटी शो भी आज के दौर में बच्चों और युवा पीढ़ी को संगीत के क्षेत्र में जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है, रियालटी शो के जरिये बच्चे संगीत से जुड़ रहे हैं, उनमें जागरूकता आ रही है. वहीं एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संगीत विश्वविद्यालय में राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संगीत को स्कूल से लेकर कॉलेज तक अनिवार्य किये जाने की भी आवश्यकता है



