रायगढ़ कल आज और कल (1)

जब हम रायगढ़ के कल की बात करते हैं तो 1990 से पहले के रायगढ़ की बात करते हैं ।तब रायगढ़ एक छोटा सा शहर हुआ करता था जो अपनी ही मस्ती में जिया करता था ,उसका अल्हड़पन रायगढ़ कोआह्लादित किया करता ,यहां की हवा में माटी की खुशबू के साथ ताजगी हुआ करती थी ।ना तो यहां प्रदूषण था और ना ही यहां सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला था और न ही यहां विषैली राजनीति हुआ करती थी ।
भले ही इस छोटे शहर के लोगों को विशेष उच्च शिक्षा और गम्भीरतम बीमारियों की इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर जाना पड़ता था लेकिन रायगढ़ की अधिकांश आवश्यकता इसी शहर में पूरी हो जाया करती थी।
उद्योगों की बात करें तो जूटमिल होने के कारण रायगढ़ की पहचान औद्योगिक मानचित्र में दर्ज थी ।राइसमिलों ,तेलमिलों का यहां जाल बिछा हुआ था ।
रायगढ़ जिले की जमीन के अंदर छिपे हुए कोयले के विशाल भंडार ,सस्ते पानी ,सस्ते श्रम ,सस्ती जमीन ,और बिकते जमीर तथा लालच ने 1990 के बाद वर्तमान रायगढ़ की नींव रख दी ,जिस पर हम कभी आगे चर्चा करेंगे कि कैसे रायगढ़ तथाकथित विकास की अंधीदौड़ में शामिल हो गया ।



