रायगढ़। देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती के अवसर पर प्रियदर्शी पेट्रोलियम परिसर में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रियदर्शी वासुदेव पब्लिक ट्रांसपोर्ट के संचालक घनश्याम सिंह मामाजी के मार्गदर्शन में प्रतिवर्ष की परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी भगवान विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाई गई।उनके खास पुरोहित पहाड़ मंदिर के युवा पुजारी महराज की यजमानी मे विधि-विधान से पूजा-अर्चना,आरती और भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं गणमान्य नागरिकों ने शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया।
गुरुवार की सुबह से ही प्रियदर्शी वासुदेव परिवार भगवान विश्वकर्मा की पूजा की तैयारियों में जुट गए थे।परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजन-अनुष्ठान कराया गया। पहाड़ मंदिर के पुजारी पं. महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ पूजा - अर्चना संपन्न कराई। तत्पश्चात् आरती और प्रसाद वितरण का क्रम शुरू हुआ।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि रायगढ़ होकर कोरबा - पुरी मार्ग पर चलने वाली बस के यात्री भी यात्रा के दौरान प्रियदर्शी पेट्रोलियम परिसर में रुके और भगवान विश्वकर्मा जी के भंडारे मे भोजन-प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए आयोजित भंडारे में देर शाम तक प्रसाद वितरण का सिलसिला चलता रहा।
प्रियदर्शी वासुदेव परिवार के वरिष्ठ मुखिया गुरुभक्त राजकिशोर सिंह ने कहा कि “मालिक का आशीर्वाद ही मेरे लिए सब कुछ है।” उन्होंने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा और आशीर्वाद से परिवार तथा संस्थान निरंतर आगे बढ़े,यही कामना है।
आयोजन को सफल बनाने में घनश्याम सिंह मामाजी एवं अभिषेक सिंह का विशेष योगदान रहा।उनकी देखरेख में पूजा-अनुष्ठान से लेकर भंडारे तक की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हुईं। शाम तक प्रियदर्शी पेट्रोलियम परिसर श्रद्धालुओं की मौजूदगी से भक्तिमय बना रहा।
आस्था के साथ सेवा का संदेश
विश्वकर्मा जयंती के इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ सेवा और सामाजिक सहभागिता का भाव भी दिखाई दिया।भंडारे में नगर के श्रद्धालुओं,गणमान्य नागरिकों,वाहन चालकों,यात्रियों और प्रियदर्शी वासुदेव परिवार से जुड़े लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में उत्सव,श्रद्धा और आत्मीयता का वातावरण बना रहा।


