हरियाणा के चुनाव परिणाम ने फिर से साबित किया कि कांग्रेस अकेले दम पर भाजपा को नहीं हरा सकती ,कांग्रेस को अहंकार त्यागना होगा

जो छत्तीसगढ़ में हुआ वही हरियाणा में हुआ , इसी की आशंका कुछ स्वतंत्र राजनैतिक प्रेक्षकों द्वारा व्यक्त की जा रही थी ।सौ बात की एक बात हरियाणा में कांग्रेस ने कांग्रेस को हराया है ,घमंड ,अहंकार और हुड्डा काअति- आत्म्विश्वास कांग्रेस को भारी पड़ गया ,कांग्रेस हवा में उड़ती रही और इसके विपरीत भाजपा ने जमीन पर रहकर बाजी पलट दी ।हरियाणा चुनाव की यही वास्तविक हकीकत है बाकी सब लफ्फाजी है ।कांग्रेस को अब चुनाव लड़ने की मशीनरी बनानी होगी ,कब तक हवा में लाठी भांजती रहेगी । हरियाणा के चुनाव परिणाम से यह एक बार फिर से साबित हो गया है कि कांग्रेस आमने -सामने की लड़ाई में भाजपा के मुकाबले चुनाव नहीं जीत सकती है ।कांग्रेस को तभी जीत मिलती है जब जनता ही बदलाव का पूरा मन बना चुकी होती है ।ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए कॉंग्रेस को भाजपा से सबक लेना चाहिए कि वो किस तरह से राज्यों के छोटे छोटे दलों से समझौता करती है जरूरत पड़ने पर वह कुछ झुक भी जाती है क्योंकि उसका लक्ष्य चुनाव जीतना हुआ करता है । बिहार इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है जहां पर कि बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने में कोई हिचक नहीं दिखाती है ।कांग्रेस ने महाराष्ट्र और झारखंड में जहां पर की निकट भविष्य में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं वहां पर सीटों के बंटवारे में कोई अहंकार ,घमंड दिखाया और जिद पकड़ी तो वह तो खुद डूबेगी ही साथ ही दूसरों को भी ले डूबेगी । वैसे भी हरियाणा की हार का असर इन दोनों राज्यों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ना तय है।



