
सत्ता बदलती है तो प्राथमिकताएं भी बदल जाया करती है ,उसका ज्वलन्त उदाहरण रायगढ़ में प्रदूषण का मुद्दा है । छत्तीसगढ में जब कांग्रेस सत्ता में थी तो भाजपा के लोग प्रदूषण का मुद्दा उठाते थे और अब जबकि भाजपा सत्ता में है तो कांग्रेसी प्रदूषण के खिलाप आवाज लगा रहे हैं ।पता नहीं कब रायगढ़ की जनता राजनैतिक दलों के इस खेल को समझेगी ,वो तो छली जाती रही है और आगे भी छली जाती रहेगी तथा उद्योंगो की मनमानी चलती रहेगी ?
इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रीसिपिटेटर (ईएसपी) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग धुएं और महीन धूल जैसे महीन कणों को हटाने के लिए किया जाता है। वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला उपकरण है। इनका उपयोग इस्पात संयंत्रों और तापीय ऊर्जा संयंत्रों जैसे उद्योगों में किया जाता है। यह उपकरण रायगढ़ जिले में ऊर्जा के लिए कोयला आधारित प्रायः सभी उद्योगों में लगा हुआ होगा ? और उसका पूरा उपयोग भी होता होगा ?इसके बावजूद रायगढ़ में फ्लाई ऐश उड़ रहा है ,वायु में प्रदूषण बढ़ रहा है तो साफ जाहिर है कि या तो उसकी क्षमता कम है या फिर उसे मनमानी तरीके से चालू या बन्द किया जाता है ।जिन उद्योगों की जनसुनवाई हो रही है उनके द्वारा किस क्षमता का ई एस पी एवं अन्य प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाए जा रहे हैं अथवा लगाए गए है उसकी जानकारी भी पूरी पारदर्शिता के साथ जन सामान्य को सुलभ कराई जानी चाहिए इसके साथ ही रायगढ़ में उन सभी उद्योगों की जांच होनी चाहिए जहां पर ईएसपी लगी हुई है ताकि यह पता चल सके कि ईएसपी को कितना चलाया जा रहा है ?



