
रायगढ़ 29 जनवरी ।
रायगढ़ में उद्योगों के विस्तारीकरण के लिए जनसुनवाई का मौसम फिर आ रहा है ।अब इसके समर्थन और विरोध का खेल शुरू हो गया है ।जब जब किसी उद्योग की पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जनसुनवाई होने वाली होती है तबतब विरोध और समर्थन का दृश्य वर्षों से देखा जा रहा है ।इन जनसुनवाई के पीछे का खेल भी निराला होता है । यदि सबकुछ पहले से तय और पूर्वनिर्धारित होता है तो फिर इन जनसुनवाईयों का औचित्य महज कागजी खानापूर्ति तक रह जाता है ।एक ही प्रकार का पर्यावरणीय अध्यन की रिपोर्ट सब तरफ घूमती रहती है ,बस स्थान और नाम बदल दिए जाते हैं ।इसी तरह विरोध में कही जाने वाली बात की प्रकृति भी एक जैसी ही होती है ।
जनसुनवाईयाँ को लेकर सबसे विडम्बना की बात यह देखने में आती है कि उद्योग लगने से या उसके विस्तारीकरण के पश्चात उत्पन्न विभीषिकाओं के फलस्वरूप जो तबका और जो क्षेत्र प्रभावित होते हैं उसी क्षेत्र के लोग समर्थन में उठखडे होते हैं ।इस तरह का समर्थन प्राप्त करने के लिए उद्योगों के कारिंदे अच्छी खासी कवायद भी किया करते हैं । किसी भी उद्योग के लगने या विस्तारीकरण के लिए सम्बंधित ग्रामसभा की अनुमति जरूरी होती है और उद्योग उसे प्राप्त कर चुके होते हैं ,। इसी सहमति के कारण विरोध में उठने वाली आवाजों का वजन कम होकर रह जाता है ।
आने वाले दिनों में रायगढ़ जिले में लगभग आधा दर्जन उद्योगों का विस्तारीकरण होना है। जर्जर सड़क और कटते उजड़ते जंगल के कारण जहां पारिस्थिकी तंत्र और जैवकीय विविधता प्रभावित हो रही है वहीं आने वाला समय फ्लाई ऐश की विकराल समस्या के कारण जिलवोसियों के लिए काफी परेशानी से भरा साबित हो सकता है ।
। रायगढ़ जिले के लोग धूल के गुबार, फ्लाई ऐश की उड़ती परत के बीच जीने को मजबूर हो चले हैं। प्रदूषण के कारण लोगों के शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से नुकसान पहुंच रहा है। वर्तमान में जिले में चर्म रोगियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। लोग हर रोज सांस के साथ काला डस्ट शरीर के अंदर लेने को विवश हैं।



