जी का जंजाल बन गया है रायगढ़ में फ्लाई ऐश

रायगढ़ ।ये ठीक है कि बिजली जरूरी है ,लोहा जरूरी है ,रोजगार देने और विकास के लिए उद्योग जरूरी है इसके बावजूद चिमनियों से फ्लाई ऐश उगलने पर कड़ाई से लगाम लगाना भी जरूरी है क्योंकि इसका सीधा सम्बन्ध हमारी सांसों से जुड़ा हुआ है । रायगढ़ फ्लाई ऐश से किस कदर प्रभावित है , उसे इस कार की छत पर जमी हुई फ्लाई ऐश की परत बताने के लिए काफी है।
जंगल में जब आग लगती है तो वो बारी बारी से सबको जलाती है, दावानल की चपेट में सभी आते हैं
घर ,आंगन ,छत ,फूल ,पेड़ ,-पौधे ,पत्तियों और हवा को फ्लाई ऐश ने बुरी तरह से अपनी चपेट में ले रखा है ।
रायगढ़ में प्रदूषण ने दावानल का रूप धारण कर लिया है प्रदूषण की चपेट में सिर्फ हमारे ही घर नहीं आ रहे हैं बल्कि उनके भी घर आ रहे हैं जो उद्योगों के समर्थक और हिमायती हैं
प्रदूषण की चपेट में लोगों के फेफड़े और उदर तो आ ही रहें इसके अलावा इसका दुष्प्रभाव लोगों की चमड़ी के ऊपर भी पड़ रहा जिसके कारण चर्मरोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है ।
90 के दशक में उद्योगों के कारण होने वाले प्रदूषण की जब बात लिखी जाती थी तब एक लाबी उन्हें विकास विरोधी कहकर उनका विरोध किया करती थी । यह सही है कि लोगों के लिए इस्पात ,बिजली ,सीमेंट जरूरी है पर इसका मतलब यह नहीं है कि लोगों को इसके लिए प्रदूषण झेलना पड़े ?
उद्योग अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में उनके उद्योगों के फलस्वरूप उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए कई प्रकार की व्यवस्था करने की बात करते हैं पर सवाल यह है कि क्या वो वास्तव में उन व्यवस्थाओं को अमलीजामा पहनाते हैं ?उत्तर यह है कि यदि वो प्रदूषण को रोकने की व्यवस्था किये होते तो फिर प्रदूषण क्यों हो रहा है ।
रायगढ़ जिले में प्रदूषण के लिए सिर्फ बड़े उद्योग ही जिम्मेदार हों यह भी पूरा सच नहीं है बल्कि प्रदूषण के लिए छोटे व मझोले उद्योग भी उतने ही जिम्मेदार हैं जितने कि बड़े उद्योग हैं ।



