रायगढ़

रायगढ़ में औद्योगिक दुर्घटनाओं में बढ़ रहे मौत के मामले ,बीते 3 सालों में 55 श्रमिको की हुई मृत्यु, औद्योगिक सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहे सवाल

रायगढ़ 8 जनवरी। स्टील उद्योग को लेकर विश्व के मानचित्र में अपना विशेष स्थान बनाने वाला रायगढ़ जिला अब उद्योगों में हो रही दुर्घटनाओं और उसमें होनी वाली मौतों को लेकर भी चर्चाओं में आ चुका है , जिसका सबसे बड़ा कारण उद्योगों के प्रबंध तंत्र के द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी करना और उसमें लापरवाही बरते जाने के रूप में सामने आया है।

रायगढ़ जिले में औद्योगिक हादसों का ग्राफ साल-दर-साल डराने वाले आंकड़े पेश कर रहा है। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के आंकड़े खुद बता रहे हैं कि पिछले तीन सालों में औद्योगिक हादसों में 55 लोगों की मौत हो चुकी है। साल 2024 और 2025 में औद्योगिक दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।
चारों तरफ से उद्योगों से घिरे रायगढ़ जिले में शायद ही कोई ऐसा महीना बीतता है, जब किसी प्लांट में हादसे की खबर आती और चीख पुकार नहीं मचती। कहीं बॉयलर फटने से मजदूर झुलसते हैं, तो कहीं बेल्ट या मशीन की चपेट में आने से कर्मचारी अपनी जान गंवा बैठते हैं। इन हादसों में कई परिवारों के चिराग बुझ चुके हैं, तो कई मजदूर गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों को लेकर किए जा रहे दावे धरातल पर फेल साबित हो रहे हैं। साल 2024 के मुकाबले 2025 में गंभीर हादसों की संख्या में इजाफा हुआ है। जानकारों का मानना है कि उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना इन मौतों की मुख्य वजह है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में सबसे कम मात्र 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आये थे जिसमें 9 कामगारों की मौत हुई थी जबकि 6 गंभीर तो 6 सामान्य रूप से घायल हुए थे मगर साल 2024 और 2025 में औद्योगिक हादसों में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 2024 में सर्वाधिक 22 प्लांटों में हादसे हुए जिसमें 23 कामगार काल के गाल में समा गये जबकि 14 गंभीर तो 18 सामान्य रूप से घायल हुए। यही स्थिति साल 2025 में भी बनी रही। 2025 में भी जिले के प्लांटों में 22 हादसे हुए जिसमें 23 लोगों की जानें चली गई जबकि 9 गंभीर और 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। हालांकि पिछले दो सालों में सामने आये आंकड़ों के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की टीम भी हादसों के ग्राफ को कम करने प्रभावी कदम उठाने शुरू कर दिये है।
औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल का कहना है कि वे समय-समय पर प्लांटों का निरीक्षण और सुरक्षा कार्यशालाओं का आयोजन कर रहे हैं। हादसों को रोकने के लिए सभी प्लांटों में सेफ्टी अफसरों की कार्यशाला ली जा रही है और सेफ्टी मित्र भी बनाये जा रहे हैं। विभाग का दावा है कि लापरवाह प्रबंधन पर नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई भी की जाती है। इसके अलावा हर महीने बाहरी जिलों की टीम में उद्योगों के रेंडम इंस्पेक्शन के लिए पहुंचती है और जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिये जाते हैं। वहीं बढ़ते हादसों को मद्देनजर अब प्लांटों में ही सुरक्षा को लेकर टीम बनायी जा रही है और उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जा रही है ताकि हादसों पर लगाम लग सके। फिलहाल रायगढ़ जिले में पिछले दो सालों से सामने आ रहे औद्योगिक हादसों के आंकड़े चिंताजनक है। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि प्रशासन की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले प्लांटों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाया जाये ताकि ऐसे हादसों में कमी लाई जा सके।

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