रायगढ़

दो वर्षों में 297 कुपोषित बच्चों को मिला संपूर्ण उपचार व पोषण सहारा

रायगढ़, 05 जनवरी 2026। खनन प्रभावित क्षेत्रों में निवासरत अंतिम व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की राज्य शासन की प्रतिबद्धता को रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में साकार रूप मिलता दिखाई दे रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास निधि (डीएमएफ) रायगढ़ के माध्यम से स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में की गई योजनाबद्ध पहल ने कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे बच्चों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तमनार में 10 बिस्तरीय पोषण पुनर्वास केन्द्र (एन.आर.सी) भवन का निर्माण डीएमएफ मद से निर्माण कर कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए क्षेत्र को सौगात दी गई । इस भवन में आज पोषण पुनर्वास केंद्र के रूप में संचालित हो रही है और
क्षेत्र के कुपोषित बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रहा है।

वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तमनार में संचालित एनआरसी के माध्यम से विकासखण्ड तमनार एवं विकासखण्ड घरघोड़ा के कुल 297 कुपोषित बच्चों को लाभ मिला। इन बच्चों को 15 दिवस के लिए एनआरसी में भर्ती कर चिकित्सकीय देखरेख के साथ-साथ प्रोटीन युक्त, संतुलित एवं पौष्टिक आहार प्रदान किया गया, जिससे उनके शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक विकास को भी मजबूती मिली।
एनआरसी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यहां बच्चों के साथ उनकी माताओं को भी देखरेख की प्रक्रिया में सहभागी बनाया जाता है। बच्चों की समुचित देखभाल के एवज में माताओं को प्रोत्साहन राशि भी प्रदाय की गई, जिससे परिवार की सहभागिता बढ़ी और उपचार की प्रभावशीलता सुनिश्चित हुई। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि भर्ती अवधि के दौरान बच्चों के वजन, ऊर्जा स्तर और समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि रायगढ़ जिले का तमनार क्षेत्र खनन प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित है। ऐसे क्षेत्रों में डीएमएफ मद से बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए राज्य शासन द्वारा योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। पोषण पुनर्वास केन्द्र इसका जीवंत उदाहरण बन कर उभर रहा है, जहां खनन से प्रभावित समुदायों के बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।
डीएमएफ योजना के तहत स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में किए जा रहे ये प्रयास “अंतिम व्यक्ति के उदय” अर्थात अंत्योदय की परिकल्पना को साकार कर रहे हैं।

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