रायगढ़

रायगढ़ जिले में बीते साल सड़क दुर्घटना के सात सौ मामले में 382 लोगों ने गंवाई जान, मोटर व्हीकल एक्ट से वसूला लगभगचार करोड़ का जुर्माना

रायगढ़ 2 दिसम्बर। छत्तीसगढ़ के पूर्वी छोर में बसा रायगढ़ अब धीरे-धीरे हादसों का गढ़ बनता जा रहा है। यहां कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब दुर्घटना से सड़क लाल नहीं होती और चीख पुकार नहीं मचती। हालांकि जिला और पुलिस प्रशासन द्वारा जिले में बढ़ते सड़क दुर्घटना और उसमें होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने प्रयासरत हैं बावजूद इसके साल-दर-साल यहां सड़क हादसों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सड़क हादसों में 1097 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। बीते साल 2025 में जिले में सड़क दुर्घटना के सर्वाधिक 7 सौ प्रकरण सामने आये जिसमें 382 लोगों की मौत हुई तो 659 लोग घायल होकर अस्पताल में पहुंचे।
देश में हर साल 5 लाख सड़क हादसे हो रहे हैं जिसमे 1.8 लाख लोगों की जान जा रही है। सड़क हादसों में 66 प्रतिशत मौतें 18 से 34 साल के लोगों की हो रही है। यह जानकारी किसी और ने नहीं बल्कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्वयं पिछले दिनों राज्यसभा में दी थी। सड़क दुर्घटनाओं को लेकर रायगढ़ की बात करें तो जिले में औद्योगिकीकरण और कोयला खदान खुलने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में साल दर साल इजाफा देखने को मिल रहा है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जो उपाय किये जाते हैं वो सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में या उसे कम करने की दिशा में नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसकी गवाही खुद सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े दे रहे हैं। साल 2025 में रायगढ़ जिले में सात सौ सड़क दुर्घटना हुई, जिसमें सर्वाधिक 382 लोगों की मौत हो गई जबकि 659 लोग घायल हुए। वहीं 2024 में 644 दुर्घटना में 362 लोगों की मौत हुई थी और 656 लोग घायल हुए थे। इसी तरह साल 2023 में हुए 641 सड़क दुर्घटनाओं में 353 लोगों की मृत्यु हुईं थी और 648 लोग घायल हुए थे। ये आंकड़े खुद बता रहे हैं कि रायगढ़ जिले में सड़क हादसों को लेकर किस तरह भयावह स्थिति बनी हुई है। सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों पर नजर डालें तो तेज़ गति से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग करना, मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए वाहन चलाना, ट्रैफिक नियमों का पालन न करना, गलत दिशा में वाहन चलाना और हेलमेट या सीट बेल्ट का प्रयोग न करना,खराब और बेढंगी बनी सड़के ,आवारा पशुओं का सड़को के ऊपर घूमना आदि दुर्घटना के प्रमुख कारण बनते है। हालांकि पुलिस और प्रशासन की ओर से इस पर लगाम कसने लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। जिले के ब्लैक स्पॉट को चिन्हित करते हुए उसे यातायात की दृष्टि से सुगम बनाया जा रहा है ताकि हादसों को रोका जा सके। तो वहीं जनजागरूकता अभियान के साथ ही यातायात नियमों की अवहेलना करने वालों पर लगातार कार्रवाई भी की जा रही है। पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो पुलिस द्वारा मोटरयान उल्लंघन के विरुद्ध जो कार्यवाही की गई उसके अनुसार 2025 में 42091 प्रकरण दर्ज हुए जिसमें अर्थ दंड के रूप में 3 करोड़ 98 लाख 54 हजार 800 राशि वसूल की गई। वहीं 2024 में 20271 प्रकरण में 1 करोड़ 36 लाख 87 हजार 250 अर्थ दंड के रूप में वसूल किया गया। इसी तरह 2023 में 46745 प्रकरण में 1 करोड़ 71 लाख 53 हजार 500 अर्थ दंड के रूप में वसूल किए गए। अर्थ दंड के रूप में जब हम नजर डालते है तो 2025 रिकॉर्ड 3 करोड़ 98 लाख 54 हजार 800 प्राप्त हुए। इसके अलावा साल 2025 में ओवर स्पीड के विरुद्ध 3762 प्रकरण में 40 लाख 66 हजार और लापरवाही पूर्वक वाहन चालन में 4758 प्रकरण में 1 करोड़ 14 लाख 65 हजार 450 राशि अर्थ दंड के रूप में प्राप्त हुए। इसी तरह इंटरसेप्टर वाहन के उपयोग कर 4883 वाहन चालकों के विरुद्ध राशि 56 लाख 78 हजार अर्थ दंड के रूप में वसूल किए गए है। इस दौरान साल भर हेलमेट जागरूकता अभियान चलाकर 2185 दो पहिया चालको को हेलमेट का वितरण भी किया गया है। वर्तमान में भी जिला प्रशासन के साथ मिलकर पुलिस द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाया जा रहा है और लोगों में ट्रैफिक नियमों को लेकर जनजागरूकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जिले में साल दर साल बढ़ रहे सड़क हादसों के ग्राफ को नियंत्रित किया जा सके और इसके लिए ट्रैफिक नियमों को लेकर जनजागरूकता होना बहुत जरूरी है।

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