भीषण गर्मी मे लोगों के मुंह मे मिठास घोल रहा महासमुंद का खरबूजाझोला भर भर हो रही खरीददारी

रायगढ़। इस वर्ष होली के बाद से ही वैशाख,ज्येष्ठ की तपती धूप से व्याकुल और बेहाल तन मन को शीतल करने के लिए इन दिनो शहर वासी शीतल पेय से अधिक सरगुजा और महासमुंद के तरबूज़ और खरबूजों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। महासमुंद की उन्नत किस्म की धारीदार खरबूज की पैदावार लोगों के मुंह मे बरबस ही मिठास घोल रहा है।सरगुजा के तरबूज़ और महासमुंद के खरबूजों के तो नगरवासी दीवाने हो चुके हैं।रोजाना प्रात:काल से ही गांधी प्रतिमा चौक पर रंग बिरंगे खरबूजों की ढेर लगाकर बैठे सब्जियों और फलों के सीज़नल व्यवसाई गणेश राम ने बताया कि शहर मे आने वाले तरबूज़ और ख़रबूज़े सरगुजा और महासमुंद से भारी मात्रा मे आ रहे हैं।इनकी पैदावार भी नदी किनारे के बजाय खेत मे होने से मिट्टी की उर्वरता फलों के स्वाद और गुणों मे काफ़ी इज़ाफ़ा करती है।यहां यह बताना लाज़िमी होगा कि पूर्व मे रायगढ़ मे तरबूज़ शिवरीनारायण और खरबूजों की आवक भोपाल से होती थी जो नदियों के तट पर रेत मे उगाए जाते हैं।इसलिए मिट्टी और रेत मे उत्पन्न होने वाली फ़सल के स्वाद मे अंतर होना स्वाभाविक है।अभी सरगुजा के लंबे तरबूज़ की मांग तेजी से बढ़ी है जबकि शिवरीनारायण और चंद्रपुर से आने वाले गोल तरबूज़ की आवक लगभग नहीं के बराबर हो गई है।वहीं सड़क पर नरम धारीदार खुशबू वाले महासमुंद के खरबूजों का ढेर देखकर ग्राहक बरबस ही इनकी ओर खिंचा चला आता है।और एकबार इनका स्वाद चखते ही स्वाद छुड़ाने पर ऐसा चढ़ जाता है कि खरीददार थैले भर भर कर ख़रबूज़े अपने साथ ले जाते हैं।रोज़ाना पिकअप मे भरकर शहर मे पहुंच रहे ख़रबूज़े चंद घंटों मे ही बाज़ार मे खपत हो जा रहे हैं।यही वजह है कि गर्मी मे सेहत और स्वाद का सबसे उत्तम फल न केवल खरीददारों के मुंह मे बल्कि व्यापारी से लेकर इनकी खेती करने वाले किसानों के जीवन मे भी मिठास घोल रहा है। शहर मे बंगला उर्फ खरबूजा के बड़े व्यवसाई गणेशराम बताते हैं कि इस साल फ़सल भरपूर है किंतु ट्रांसपोर्टिंग महंगी होने के कारण मॉल मे महंगाई दर का थोड़ा बहुत असर अवश्य दिख रहा है,फिर भी आम उपभोक्ताओं के बजट का खयाल रखते हुए बिल्कुल रियायती मुनाफा दर में ही विक्रय किया जा रहा है जो ग्राहकों को भी पसंद आ रहा है।विगत दो दशकों से पपीता,तरबूज़ और खरबूजों का सीज़नल व्यापार करते आ रहे गणेशराम का कहना है कि काफ़ी समय से गर्मी मे फलों के रेट मे बेतहाशा इज़ाफ़ा हो रहा है,चाहे वह सेब हो,अंगूर हो,आम हो,केला हो,लीची हो वगैरह वगैरह,जिसे देखते हुए तरबूज और खरबूज के दर मे फिर भी काफ़ी गनीमत है।यही वजह है कि हर तबका इस मौसमी फलों का लुत्फ़ उठा रहा है।
हरेराम तिवारी , पत्रकार ।





