रायगढ़

रायगढ़ में केलो नदी पर आजादी से पहले राजा चक्रधर सिंह के नाम पर बना था चक्रधर ब्रिज ,जो आज भी शान से दे रहा है अपनी सेवा

रायगढ़ 22 जुलाई। देश अंग्रेजों की गुलामी से बाहर निकलने के लिए जब पूरी तरह से बेचैन हो चुका था और 1946 में यह लगभग स्पष्ट हो चला था कि अब देश को आजादी कभी भी भी मिल सकती है ऐसे दौर में रायगढ़ के राजा चक्रधर सिंह ने केलो नदी के ऊपर पहले सड़क पूल का निर्माण शुरू करवाया था ।

पूल का निर्माण पूरा हो जाने पर इस पूल का उद्घाटन स्वयं राजा चक्रधर सिंह ने 27 मार्च 1947 को किया था ।इस पूल का नामकरण राजा चक्रधर सिंह के नाम पर चक्रधर ब्रिज किया गया था ।इस पूल की गुणवत्ता ,मजबूती के अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्माण के लगभग 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद यह पूल केलो की धारा के बीच पूरी मजबूती के साथ खड़ा होकर अपनी सेवाएं दे रहा है।


27मार्च 1947 से पहले रायगढ़ में केलो नदी के ऊपर कोई सड़क पूल ना होने के कारण बरसात के समय चक्रधरनगर सहित पूरे पूर्वांचल के रायगढ़ से सम्पर्क लगभग कट जाया करता था । बाकी अन्य समय लोग केलो नदी को नाव से या फिर छिछले पानी के अंदर से पार किया करते थे ।अपनी प्रजा की इस परेशानी को समझने के कारण राजा चक्रधर सिंह ने राजकोष से पूल बनवाने का काम शुरू करवाया था और इस तरह रायगढ़ में केलो नदी पर आजादी के पहले चक्रधर ब्रिज बना ।इससे पहले स्टेट काल में खर्राघाट में केलो के ऊपर एक रपटा हुआ करता था जो केलो में बाढ़ आने पर डूब जाया करता था ।
1947 में केलो पर पूल बन जाने के बाद चक्रधर नगर क्षेत्र का विकास को गति मिली और पूर्वांचल के गांवों से कृषि और वन उत्पाद आसानी और निर्बाध रूप से रायगढ़ पहुंचना शुरू हुआ जिसके कारण व्यापार में भी बढ़ोतरी हुई ।1962 में चक्रधरनगर क्षेत्र में कलेक्टोरेट और जिला न्यायालय का निर्माण हुआ ।इस तरह केलो नदी पर रायगढ़ में बने पूल से विकास की गति को काफी बल मिला था।

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