
रायगढ़। 1962 से जबसे रायगढ़ लोकसभा सीट अस्तित्व में आई है तबसे लेकर 2019 के चुनाव तक इस सीट पर 9 बार गैर कांग्रेसी तो 6 बार कांग्रेसी सांसद चुना गया है ।रायगढ़ लोकसभा से चुने गए दो सांसद नरहरि साय और विष्णुदेव साय केंद्र में मंत्री बनने में भी कामयाब रहे ।
रायगढ़ संसदीय सीट से भाजपा के विष्णुदेव साय सर्वाधिक चार बार तो कांग्रेस की पुष्पा देवी तीन बार सांसद चुनी गई ।
1962 में रायगढ़ लोकसभा सीट पहली बार स्वतन्त्र रूप से अस्तित्व में आई थी ।जशपुर महाराज विजयभूषण सिंहदेव राम राज्य परिषद से पहलीबार रायगढ़ लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे ।
1962 से पहले रायगढ़ ,सरगुजा एक संयुक्त लोकसभा सीट थी।
1967 में सारंगढ़ राजघराने की राजकुमारी रजनीगन्धा देवी कांग्रेस की टिकट पर रायगढ़ लोकसभा से सांसद चुनी गई।
1971 के चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर उम्मेद सिंह राठिया निर्वाचित हुए।
1977 में जनता पार्टी की टिकट पर नरहरि साय रायगढ़ से लोकसभा में पहुंचे ।
1980 और 1984 के चुनाव में सारंगढ़ राजघराने की राजकुमारी पुष्पा देवी ने लोकसभा में रायगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।
1989 में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने रायगढ़ लोकसभा सीट पर अपना परचम लहराया और उसके उम्मीदवार नन्दकुमार साय चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुँचे।
1991 के चुनाव में भाजपा के हाथों मिली पिछली पराजय का हिसाब चुकता करते हुए कांग्रेस की पुष्पा देवी रायगढ़ सीट से जीतकर तीसरी बार लोकसभा में पहुँच गई।
1996 के चुनाव में भाजपा ने रायगढ़ सीट वापस अपनी झोली में डाल ली और नन्दकुमार साय दूसरी बार लोकसभा में पहुँच गए।
1998 में रायगढ़ सीट से कांग्रेस की टिकट पर अजीत जोगी ने लोकसभा का चुनाव लड़ा और काफी संघर्ष पूर्ण मुकाबले में जोगी जीत हासिल कर लोकसभा में पहुँचे।
1999 से 2014 के मध्य चार बार लगातार रायगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा के विष्णु देव साय सांसद निर्वाचित हुए।
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने विष्णुदेव साय के स्थान पर गोमती साय को अपना उम्मीदवार बनाया और वे कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया को पराजित कर लोकसभा के लिए निर्वाचित होकर रायगढ़ सीट से भाजपा की पहली महिला सांसद बनी।



