
रायगढ़। महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह महिला आरक्षण के नाम पर भ्रम फैला रही है और असल में परिसीमन बिल को आगे बढ़ाना चाहती है। कांग्रेस का कहना है कि वह हमेशा से महिला आरक्षण के समर्थन में रही है। इसको लेकर सोमवार को कांग्रेस ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की।
महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को लेकर सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा है कि बीजेपी द्वारा यह प्रचार किया जा रहा है कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, जबकि सच्चाई यह है कि महिला आरक्षण बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और इस पर राष्ट्रपति की मुहर भी लग चुकी है। कांग्रेस का आरोप है कि 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत 131वें संविधान संशोधन विधेयक का महिला आरक्षण से सीधा संबंध नहीं है। पार्टी के अनुसार, इस विधेयक के जरिए बीजेपी महिला आरक्षण को मुद्दा बनाकर परिसीमन संशोधन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े कानूनों में बदलाव करना चाहती थी। कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस विधेयक में लोकसभा सीटों की संख्या 850 करने का प्रस्ताव था, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें शामिल थीं। साथ ही परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई थी। पार्टी के अनुसार, देश के कई राज्यों ने परिसीमन बिल पर आपत्ति जताई, जिसके चलते यह विधेयक पारित नहीं हो सका। कांग्रेस का कहना है कि जब 2026-27 में नई जनगणना प्रस्तावित है, तो पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कराना उचित नहीं है। कांग्रेस ने दोहराया कि वह महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक है और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर सियासत और कितनी तेज होती है।



