रायगढ़

आओ वसन्त आओ तुम्हारा स्वागत है

रायगढ़ की ग़जमार पहाड़ी के पीछे से आज जो भगवान भाष्कर उदित हुए हैं वो उत्तरायण होकर निकले हैं।अब अब उनकी किरणे धरती पर सीधी पड़ना प्रारम्भ हो जाएंगी ।
शीत लहरी और कोहरे से व्याकुल हुआ जनमानस भी राहत की सांस लेना शुरू कर देगें ।
शिशिर की विदाई की घड़ी नजदीक आती जा रही है और ऋतुराज वसन्त पूरी आकुलता के साथ आने की प्रतीक्षा कर रहा है ।
इस समय शहर में जो बयार बह रही है वह भी वसन्त के आने का संकेत दे रही है।।
खेतों में सरसों पकने की ओर बढ़ रही है ,रहर में लगीं बालियां पुष्ट हो रही है ,कुसियार में भरा रस भी गाढ़ा होने लगा तो खेत में दबा सब्जियों का राजा आलू भी पकने लगा है ।प्याज और लहसुन की बात करें तो वो भी जवान होने की राह पर अग्रसर हैं ।
गेहूं की अगैती वाली खेती में बालियां आना शुरू हो गई होंगी तो पिछड़ी खेती के गेहूँ को बालियां आने का इंतजार है ।

इसके इतर बात करें वसन्त की तो उसके आने का बेसब्री से प्रतीक्षा आम्रवृक्ष कर रहें उनके हरित पल्लवो की खुशी का भी ठिकाना नही है क्योंकि अब उन्होंने भी सुनहले मुकुट धारण करना शुरू कर दिया है वसन्त के आते तक उनकी सुनहरी दमक सूर्य की रोशनी पड़ते और भी दमकती ,चमकती दिखाई देगी और जब इस बीच अमराई में छिपी कोयल अपना मधुर राग बिखेरेगी तो वसन्त भी अपने पूरे राग से गूंजेगा ।तो हम भी इंतजार करते हैं वसन्त के आगमन का ।

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