रायगढ़

सारँगढ़ के कपिस्दा में पांच गांव के ग्रामीण महिला पुरुष जनसुनवाई के विरोध में धरने पर बैठे,ग्रीन सस्टेबल कंपनी की जनसुनवाई नहीं कराने पर अड़े,तीन जिलों से पुलिस बल तैनात

रायगढ़ 17 नवम्बर ।मेसर्स ग्रीन सस्टेबल मैन्युफेक्चिरिंग कंपनी को आवंटित लालाधुरवा-जोगनीपाली लाइम स्टोन खदान के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हासिल करने आयोजित जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर प्रभावित पांचों गांव के ग्रामीण महिला पुरूष पिछले चौबीस घंटे से सारंगढ़ के कपिस्दा में डटे हुए हैं और धरना दे रहे हैं।

ग्रामीणों के इस विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और तीन जिलों की पुलिस भी तैनात कर दी गई है। ग्रामीणों ने जनसुनवाई के लिए टेंट तक नहीं लगने नहीं दिया है।

सारंगढ़ के लालाधुरवा-जोगनीपाली में मेसर्स ग्रीन सस्टेबल मैन्युफेक्चिरिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड भुवनेश्वर को आवंटित लाइम स्टोन खदान के विरोध में ग्रामीणों ने आर या पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है और जनसुनवाई स्थल कपिस्दा में डेरा डाल दिया है। रविवार से ही प्रभावित गांव  लालाधुरवा, जोगनीपाली, धौराभांठा, कपिस्दा और सरसरा के ग्रामीण महिला, पुरूष युवा और बच्चे जनसुनवाई स्थल कपिस्दा के गौठान में पहुंचकर, धरना देकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं और जनसुनवाई किसी भी कीमत पर नहीं होने देने की बात पर अड़े हुए हैं।

ठिठुरती ठंड में भी ग्रामीणों का हौसला पस्त नहीं हो सका और कड़कड़ाती ठंड की रात में ग्रामीणों ने आसमान के तले रात गुजारी और सोमवार की सुबह से फिर अपनी जमीन कंपनी को नहीं देने की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से जनसुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कपिस्दा में रायगढ़, सारंगढ़ और सक्ती जिले से फोर्स बुलाकर तैनात कर दिया गया है। इसके बावजूद ग्रामीण वहां धरने पर बैठे हुए हैं। यहां तक की अब तक प्रस्तावित स्थल पर ग्रामीणों ने जनसुनवाई के लिए टेंट तक लगाने नहीं दिया है। हालांकि ग्रामीणों के इस भारी विरोध के बीच रायगढ़ से क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी, सारंगढ़ से अपर कलेक्टर के साथ ही एसडीएम और तहसीलदार की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और उनके द्वारा ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है मगर ग्रामीण अब तक अपनी बात को लेकर अड़े हुए हैं और जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू होने नहीं दे रहे हैं. ग्रामीण लगातार नारेबाजी कर रहे हैं।

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