संपादकीय

कला प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाती है : हरिओम राजौरिया

रायगढ़ 2जनवरी। देश में इस समय थियेटर करना एक चुनौती है जिसके कारण कलाकारों का कर्तव्य और भी महत्वपूर्ण हो जाता है ।उक्त बातें मध्यप्रदेश इप्टा के अध्यक्ष हरिओम राजौरिया ने आज पत्रकारों से एक चर्चा के दौरान कहीं ।हरिओम राजौरिया रायगढ़ में आयोजित 28 वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह में शामिल होने के लिए पहुँचे हैं । इसके पूर्व उन्हें 13 वें शरदचन्द्र वैरागकर रंगकर्मी सम्मान से भी सम्मानित किया गया ।
श्री राजौरिया ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कला दो प्रकार की हुआ करती है एक कला के लिए तो दूसरा लोगों के लिए उंन्होने कहा कि कला प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभाती है और इसके माध्यम से वह सच्चाई को दिखाती है तथा समाज की असलियत को भी सामने लाती है ।
ढाई आखर प्रेम को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में हरिओम राजौरिया ने कहा कि ढाई आखर प्रेम ,कबीर की वाणी है और कबीर की वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितना कि वह कबीर के दौर में थी ।उंन्होने कहा कि प्रेम से सबको एक साथ जोड़ा जा सकता है इसके लिए और कोई दूसरा रास्ता नहीं है जिसमें कला भी एक प्रमुख जरिया है।

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