मुखर पत्रकारिता का खामोश यात्री, हेमन्त थवाईत :मुकेश जैन

किसी ने कहा है “मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे” उक्त पंक्ति प्रिय छोटे भाई हेमन्त थवाईत के संदर्भ में सटीक बैठती है। हेमन्त ने किशोरावस्था से ही खुद को ‘केलोप्रवाह’ के दफ्तर में बंद कर लिया था तथा पूरी जवानी अपने अखबार को खड़ा करने में होम कर दी। आज भी आम जीवन के शोर-शराबे से दूर केलो-प्रवाह का दफ्तर ही उसकी दुनिया है। अनेक कठिन उतार-चढ़ावों के बीच विगत तीन दशकों से ‘दैनिक केलोप्रवाह’ यदि इस अंचल के आम लोगों की मुखर आवाज बना हुआ है तो, उसके पीछे हेमन्त की कड़ी मेहनत, समर्पण और व्यापक समझ ही मुख्य कारक है। सार्वजनिक रूप से हेमन्त बहुत कम ही दिखता है लेकिन अपनी कलम के द्वारा सार्वजनिक जीवन की प्रायः हर गतिविधि में वह अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा देता है। यही सर्व-स्वीकार्यता ही उसकी सबसे बड़ी सफलता है।
प्रिय हेमन्त को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। ईश्वर हर कदम पर सफलता दें और तुम्हें सदैव खुश रखें। 🌹
मुकेश जैन



