आईटीआई रायगढ़ में सेबी का जागरूकता कार्यक्रम संपन्न*

रायगढ़ ।सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया SEBI के द्वारा “स्मार्ट निवेशक जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था रायगढ़ जिला रायगढ़ में दिनांक १२/११/२०२५ को किया गया जिसमें सेबी के प्रतिनिधि द्वारा विभिन्न विषयों में व्याख्यान दिया गया जिसमें बहुत सारे बिंदुओं में विस्तार से चर्चा की गई आज की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में आर्थिक सुरक्षा हर व्यक्ति की पहली प्राथमिकता बन चुकी है। बढ़ती महंगाई, अस्थिर रोजगार स्थिति और बदलते जीवन स्तर को देखते हुए, फाइनेंशियल प्लानिंग (वित्तीय योजना) का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। फाइनेंशियल प्लानिंग का अर्थ है अपनी आय (Income), खर्च (Expenses), बचत (Savings) और निवेश (Investment) का सुव्यवस्थित प्रबंधन करना ताकि व्यक्ति अपने अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों को आसानी से प्राप्त कर सके।
फाइनेंशियल प्लानिंग केवल धन संचय तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें बजट बनाना, ऋण प्रबंधन, बीमा कवरेज, टैक्स प्लानिंग, और सेवानिवृत्ति योजना जैसे पहलू शामिल होते हैं। एक सही वित्तीय योजना व्यक्ति को आर्थिक अनिश्चितताओं से बचाती है और भविष्य के लिए सुरक्षा प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चों की शिक्षा, विवाह या अपनी रिटायरमेंट के लिए समय रहते निवेश करना शुरू करता है, तो वह भविष्य में आर्थिक तनाव से मुक्त रह सकता है।
अब बात करते हैं स्मार्ट इन्वेस्टर (स्मार्ट निवेशक) की। एक स्मार्ट निवेशक वह होता है जो केवल लाभ के लालच में नहीं बल्कि सोच-समझकर निवेश करता है। वह अपने वित्तीय लक्ष्यों, जोखिम सहने की क्षमता (Risk Appetite) और निवेश अवधि (Time Horizon) का सही विश्लेषण करता है। स्मार्ट इन्वेस्टर जानता है कि “सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखे जाते” — यानी वह विविधीकरण (Diversification) का पालन करता है। वह म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, सरकारी बॉन्ड, पीपीएफ, बीमा और रियल एस्टेट जैसे विकल्पों में संतुलित निवेश करता है। साथ ही, वह नियमित रूप से अपने निवेश की समीक्षा करता है और आवश्यकतानुसार बदलाव करता रहता है।
स्मार्ट निवेशक बाजार की अफवाहों या दूसरों की सलाह पर नहीं चलता, बल्कि तथ्यों और विश्लेषण के आधार पर निर्णय लेता है। वह यह समझता है कि निवेश में “धीरे-धीरे और नियमित रूप से” बढ़ना अधिक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। उदाहरण के लिए, SIP (Systematic Investment Plan) के माध्यम से म्यूचुअल फंड में निवेश करने से वह बाजार के उतार-चढ़ाव से भी संतुलन बनाए रखता है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है निवेश जागरूकता (Investment Awareness)। जागरूक निवेशक वह होता है जो निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी प्राप्त करता है। भारत जैसे देश में अब भी बहुत से लोग बिना पूरी जानकारी या गलत सलाह पर निवेश करते हैं, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। निवेश जागरूकता का अर्थ है निवेश के सिद्धांतों, योजनाओं की शर्तों, संभावित जोखिमों और अपेक्षित लाभ की समझ होना।
सरकार और वित्तीय संस्थान समय-समय पर निवेश जागरूकता अभियान (Investor Awareness Programs) चलाते हैं ताकि लोग समझ सकें कि कैसे वे सुरक्षित और लाभदायक तरीके से निवेश कर सकते हैं। जागरूक निवेशक धोखाधड़ी, फर्जी योजनाओं और झूठे वादों से बचता है। वह दस्तावेज़ों को पढ़ता है, प्रमाणित सलाहकारों की मदद लेता है और केवल नियामक संस्थाओं (जैसे SEBI, RBI, IRDAI) से अनुमोदित विकल्पों में निवेश करता है।



