रायगढ़

धरा का सबसे बड़ा कौतूहल महाकुंभ प्रयागराज अद्भुत,अलौकिक और अविस्मरणीय,श्रद्धा,आस्था और अध्यात्म का महासंगम विश्व के लिए शोध का विषय:हरेराम तिवारी

रायगढ़….। प्रयागराज महाकुंभ 2025 केवल धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि भारतीय आध्यात्मिकता और संस्कृति की जीवंत धरोहर है।संगम के तट पर स्नान करने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु जुटे हुए हैं।नागा साधु, तपस्वी और संत अपने आश्रमों में साधना और प्रवचन कर रहे हैं,जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है। हर सुबह और शाम गंगा आरती की दिव्य छटा श्रद्धालुओं को मोहित कर रही है।श्रद्धालुओं के लिए विशेष टेंट सिटी बनाई गई है,जहां स्वच्छ पेयजल,शौचालय और भंडारे की उत्तम व्यवस्था है।कुंभ क्षेत्र में योग,ध्यान,कथाएं और संगीत के आयोजन हो रहे हैं।कलाकार लोकनृत्य और पारंपरिक संगीत प्रस्तुत कर रहे हैं,जिससे भारतीय संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है।विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों द्वारा सेवा कार्य किए जा रहे हैं,जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक ही नहीं,बल्कि सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक भी बन गया है।विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक कुंभ में भाग ले रहे हैं।वे भारतीय संस्कृति,योग और अध्यात्म को नजदीक से देख रहे हैं और इस दिव्य आयोजन का हिस्सा बनकर भारत की आध्यात्मिक शक्ति को महसूस कर रहे हैं।

देश ने सनातन की ऐसी जबरदस्त ताकत इससे पहले कभी नहीं देखी थी। पिछले कुंभ में भी नहीं।उत्तर प्रदेश सरकार के शासकीय आंकड़े बताते हैं कि 60 करोड़ से भी ज्यादा सनातनी,गंगाजी में डुबकी लगा चुके हैं।महाशिवरात्रि के दिन बुधवार को कुंभ मेला का समापन होने जा रहा है। इस बिराट समागम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनियां मे केवल भारत और चीन की जनसंख्या ही यहां आने वाले लोगों की संख्या से अधिक है। देखा जाए तो भारत देश की इस प्राचीन परम्परा ने अपनी दिव्यता और भव्यता से पूरी दुनियां को न सिर्फ मुग्ध किया है बल्कि आश्चर्य चकित भी कर दिया है। यूरोप में सबसे ज्यादा जनसंख्या का देश है -जर्मनी।जर्मनी में 8.45 करोड़ लोग रहते हैं।मजेदार बात यह,कि पूरे जर्मनी की लोकसंख्या से भी ज्यादा सनातनी श्रध्दालूओं ने,मात्र एक दिन में प्रयाग महाकुंभ में,गंगा जी में स्नान किया हैं। विश्व चकित है।अचरज भरी नजरों से भारत को देख रहा है। सनातन की प्रस्फुटित होती इस शक्ति को देखकर वे भौचक हैं।वे अब भारत को और अच्छे से समझने का प्रयास कर रहे हैं। इस वर्ष भारत में विदेशी पर्यटक तो रिकॉर्ड संख्या में आए ही,किंतु विश्व के विभिन्न विश्वविद्यालयों में चल रहे ‘इंडोलॉजी’ के कोर्स को इस वर्ष रिकार्ड विद्यार्थी मिलेंगे

महाकुंभ हमेशा से केवल स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भर नहीं रहा,बल्कि यह सेवा और त्याग की मिसाल भी प्रस्तुत करता रहा है। महाकुंभ के इस अद्भुत नजारे ने यह दिखाया कि जब श्रद्धा और समर्पण दिल से होते हैं,तो हर कठिनाई भी छोटी लगती है।दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम के रूप में मनाया जाने वाला महाकुंभ मेला सनातनी आस्था,संस्कृति और प्राचीन परंपरा का अद्भुत और बेमिसाल मिश्रण है।महाकुंभ मेला अनुष्ठानों का एक भव्य आयोजन है,इन सभी में स्नान सबसे महत्वपूर्ण है।त्रिवेणी संगम पर आयोजित इस पवित्र समागम में भाग लेने के लिए लाखों तीर्थयात्री एकत्रित होते हैं,जो इसमें विश्वास रखते हैं कि पवित्र जल में डुबकी लगाने से व्यक्ति सभी पापों से मुक्त हो सकता है।

धार्मिक अनुष्ठानों के अलावा प्रयागराज सांस्कृतिक,ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प रत्नों की एक समृद्ध श्रृंखला प्रदान करता है।शहर में हनुमान मंदिर,अलोपी देवी मंदिर और मनकामेश्वर मंदिर,प्राचीन किला मे विद्यमान अक्षयबट जैसे कई प्राचीन मंदिर हैं,जिनमें से प्रत्येक का बहुत धार्मिक महत्व है और शहर की गहरी आध्यात्मिक विरासत की एक झलक प्रस्तुत करता है।ये मंदिर अपने अद्भुत डिजाइन और सदियों पुरानी किंवदंतियों के साथ हिंदू परंपराओं के साथ शहर के लंबे समय से जुड़े होने का प्रमाण हैं।इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए प्रयागराज में अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल भी हैं। यह प्राचीन इमारत भारत के समृद्ध ऐतिहासिक अतीत की याद दिलाती है। इसके शिलालेख देश की प्राचीन सभ्यता को दर्शाते हैं।शहर की औपनिवेशिक युग की वास्तुकला, जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय भवन और स्वराज भवन जैसी संरचनाएं शामिल हैं,इस क्षेत्र के आकर्षण को और बढ़ा देती हैं।ये इमारतें ब्रिटिश औपनिवेशिक काल की स्थापत्य भव्यता की एक आकर्षक झलक प्रदान करती हैं। तीर्थयात्री हलचल भरी सड़कों और बाजारों के बारे में भी जान सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय संस्कृति,कला और व्यंजनों का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं,जो सभी शहर के जीवन में एक अनूठा झरोखा पेश करते हैं।इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक खजानों के अलावा प्रयागराज इलाहाबाद विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी हैं,जिसे ‘पूर्व का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता है। इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने वर्षों से भारत के बौद्धिक परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इसके अलावा कुंभ मेले में अखाड़ा शिविर आध्यात्मिक साधकों,साधुओं और तपस्वियों को एकत्र होने,दर्शन पर चर्चा करने,ध्यान करने और अपने ज्ञान को साझा करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।ये शिविर केवल पूजा स्थल नहीं हैं बल्कि ऐसे स्थान हैं जहां ज्ञान का आध्यात्मिक आदान-प्रदान होता है,जो महाकुंभ मेले में भाग लेने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए वास्तव में समृद्ध अनुभव प्रदान करता है। साथ में ये आकर्षण महाकुंभ मेला 2025 को आस्था, संस्कृति और इतिहास का उत्सव मनाने का मौका देते हैं,जो भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए एक अविस्मरणीय यात्रा का अनुभव प्रदान करते हैं।

सनातन के इस चैतन्य को प्रणाम..!

प्रयागराज को जोड़ते हुए सभी राष्ट्रीय राजमार्गों पर इन दिनों अलग-अलग राज्यों की नंबर प्लेट लगाए हुए हजारों कार,जीप,टेम्पो ट्रॅवलर,बस, ट्रक..इन सब का महाकाय प्रवाह बना हुआ हैं। लगभग प्रत्येक वाहन पर भगवा ध्वज है।किसी के झंडे पर श्रीराम का चित्र बना है,तो किसी ने उस पर हनुमान जी को पसंद किया हैं।रास्ते के सभी ढाबे,होटल,पेट्रोल पंप,लोगों से भरे पड़े हैं।जहां भी थोड़ा पानी दिखा,पेड़ की छांव देखी,या मंदिर दिखा,दूर से आने वाली गाड़ियां वहीं पर रुक जाती हैं। गाड़ी के प्रवासी अपनी पथारी पसार के,थोड़ा बहुत विश्राम कर रहे हैं।कुछ नाश्ता/भोजन भी चल रहा है। हजार से ज्यादा किलोमीटर का यह महामार्ग,इन दिनों उत्सवी वातावरण में हैं।दिन-रात प्रवास करने वाले लोगों में गजब का उत्साह है।इतने लंबे,थका देने वाले प्रवास के बावजूद भी,उन सबके चेहरे पर आनंद है।जाने वालों के चेहरे पर उत्सुकता छलक रही हैं,तो वापस आने वाले लोगों के चेहरे पर कृतार्थता..!

इन प्रवासियों में सभी भाषाओं के, सभी आयु वर्ग के,सभी आर्थिक स्तर के लोग शामिल हैं। इनमें कोई भेदभाव नहीं हैं। ट्रक में भरकर जा रहे कर्नाटक के भाविकों से वैसा ही व्यवहार हो रहा हैं,जैसा इनोवा में चल रहे तेलंगाना के प्रतिष्ठित परिवार से। इस समय यह सारे लोग सनातन की अक्षुण्ण यात्रा के सहप्रवासी हैं।यह सभी,प्रयाग कुंभ के यात्री हैं।

रास्ते में अनेक स्थानों पर लोगों ने निःशुल्क रहने की व्यवस्था की हैं। अनेक स्थानों पर भंडारे चल रहे हैं। स्थान-स्थान पर कुंभ यात्रियों के स्वागत के बैनर लगे हुए हैं।सिवनी से आगे प्रयाग तक,सरकार ने इस महामार्ग के सभी टोल खोल दिए हैं। अब यह पूरा रास्ता निःशुल्क है। उत्सवी जनता के साथ संवेदनशील सरकार खड़ी हैं। हालांकि रास्ता सुगम नहीं हैं।हजारों-लाखों प्रवासियों के कारण रास्ते पर जाम लगना या रास्ते को कुछ समय के लिए विवशता बस बंद करना,यह आम बात हैं। केरल, तमिलनाडु,तेलंगाना,कर्नाटक, महाराष्ट्र,आंध्र से आने वाले सभी भाविकों को इसका पूरा अंदाजा है। यह यात्रा कष्टप्रद है,10-20 किलोमीटर चलना पड़ता हैं,इन सब की उन्हें जानकारी हैं। किंतु फिर भी वह सारे आनंदित हैं। प्रमुदित हैं..!

अर्थतंत्र को किया बूस्ट

इस कुंभ ने भारत के अर्थतंत्र को जबरदस्त गति दी है।कुंभ की आलोचना करने वालों के समझ में शायद यह बात नहीं आई है।कुंभ का प्रभाव मात्र प्रयागराज,या काशी या अयोध्या तक ही सीमित नहीं है, प्रयाग को जाने वाले प्रत्येक मार्ग, राजमार्ग,महामार्ग पर लाखों लोगों के जीवन में,इस कुंभ ने आत्मविश्वास का प्रकाश लाया हैं।टूरिस्ट एजेंसी वाले, कार / टैक्सी / बस / ट्रक वाले, ड्राइवर, पेट्रोल पंप, ढाबे वाले, छोटी-छोटी वस्तुएं बेचने वाले,होटल चलाने वाले,सब्जी -फल की बिक्री करने वाले, झंडा बेचने वाले,टायर का काम करने वाले..सभी आनंद में हैं। बहुत आनंद में।अनेकों ने इन एक माह मे,पूरे वर्ष भर का व्यवसाय कर लिया है।मुझे पूरा विश्वास है,इस महाकुंभ के माध्यम से जागृत हुई यह चेतना,राष्ट्र हित में निश्चित प्रवाहित होगी..!

महाकुंभ की तैयारियों पर शोध

महाकुंभ की अद्भुत,अविस्मरणीय, अतुलनीय प्रशासनिक तैयारियां अब शोध-अनुसंधान का विषय..
“प्रथमं तीर्थराजं तू प्रयागाख्यं सुविश्रुतिम। कामिकं सर्वतीर्थानां धर्म कामार्थ मोक्षदम।।” अर्थात तीर्थराज प्रयाग का नाम सर्वश्रेष्ठ तीर्थ के रूप में लोक विख्यात है।यह सभी तीर्थों के फलों को देने वाला अकेला तीर्थ है,जो व्यक्तिविशेष के जीवन में-धर्म,अर्थ,काम एवं मोक्ष- नामक चारों पुरुषार्थों का प्रदाता है।यूं तो हर 12 वें वर्ष में यहां कुंभ का आयोजन अनंत काल से हो रहा है, लेकिन महाकुम्भ का आयोजन प्रयागराज हर बार 144 वें वर्ष में ही होता है।इसलिए पतित पावनी गंगा,कलंक प्रक्षालिनी यमुना और अंतर्धारा पुण्य सलिला सरस्वती नदी के त्रिवेणी संगम तट पर अवस्थित प्रयागराज,उत्तरप्रदेश,भारत गणराज्य का अलग ही महात्म्य है।

बहरहाल यह पावन स्थल सनातन धर्मियों के साथ ही अध्यात्म एवं धार्मिक आस्था में विश्वास रखने वाले प्रत्येक मानव के लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु बना हुआ है।साथ ही, धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों को समझने एवं अध्ययन,चिंतन-मनन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन चुका है। इस बार महाकुंभ के महात्म्य एवं गरिमा को नई ऊर्जा एवं व्यवस्था की दृष्टि से ऐसी आभा,शोभा,महात्म्य एवं ऐश्वर्यवान व्यवस्था मिली है,जो हमें राम-राज्य की उस स्मृति शेष व्यवस्था की याद दिलाती है जबकि हमारे राष्ट्र का भव्य गौरव,समृद्धि,ऐश्वर्य और समृद्धि सभी शिखर पर थे,जिसको ललचायी दृष्टि,ईर्ष्यालू स्वभाव से देखने वाले लुटेरे सबकुछ लूटने के लिए आकर्षित हुआ करते थे।

अथक,अखंड प्रशासनिक व्यवस्था

देखा जाए तो यह महाकुम्भ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था की सुदृढ़ता, इसके लौह कवच रूपी अदम्य साहस, अपराजेय संकल्प शक्ति,अखंड आत्मविश्वास,कभी न थकनेवाली पुलिस-प्रशासनिक व्यवस्था के लिए किए गये अनुपम एवं विलक्षण प्रयास जिज्ञासु जनों के लिए शोधकार्य का विषय है। इस महाकुम्भ की कमान उत्तरप्रदेश के,यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के योग्य करकमलों में है।हालांकि,कुछ विघ्न संतोषी,सनातन विरोधी और धार्मिक आस्था के प्रति अरुचि रखने वाले दोहरे चरित्र के लोग,किसी न किसी बहाने महाकुंभ मेला की सुदृढ़ व्यवस्था में छेद करने के लिए यत्र-तत्र प्रयासरत हैं।चूंकि मैं स्वयं पैतृक प्रयागराज जनपद से ही हूं।इसलिए इससे जुड़ी बहुत सारी अनुभूतियों को संजोए हुए हूं। जबकि,सेवा,समर्पण और आस्था से लबालब होने के कारण मन करता है कि श्रद्धालुओं के वास्ते सब कुछ ऐसा करूं जिससे मैं भी महाकुम्भ में आने जाने वाले धर्मानुरागी व्यक्तियों के लिए सहयोगी बन सकूं।वाकई महाकुम्भ अखंड सनातन गर्व,हिन्दू महापर्व का दिव्य-भव्य,मानवीय मूल्यों की एकता को आलोकित करने वाला,एक अविचल और अलौकिक अनुभूति लिए माननीय योगी जी की प्रशासनिक दक्षता का एक ऐसा दिव्य प्रयास है जहां सबकुछ आंखों के सामने ठहर जाता है कि हम ऐसे सफल सुप्रयासों की कैसे-कैसे प्रशंसा करें। क्योंकि पूरी व्यवस्था में किंचित मात्र भी कमी नहीं है।जो लोग स्वभाव बस इस पुनीत प्रयासों में कमी ढूंढते हैं,वह भी किंकर्तव्यविमूढ़ हैं,क्योंकि कमी कहीं नहीं है।किसी भी व्यवस्था में नहीं है।

जरा सोचिए यदि 60 करोड़ लोग ऐसे ही जलाशय,समुद्र या नदी में स्नान करते,जहां ईश्वरीय प्रताप या दिव्यता के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद न होता तो करोड़ों लोग स्किन रोग के शिकार हो जाते।परन्तु यह पुण्य तीर्थराज प्रयागराज हैं; जहां सभी तरह से मां गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम पर स्नान करने से ही नहीं अपितु दर्शन लाभ से भी धर्म,अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
हालांकि ईश्वर सबके धैर्य,पराक्रम, साहस,प्रशासनिक दक्षता,धार्मिक आस्था और त्याग की परीक्षा लेता है। योगी जी का भी लिया,जो अव्वल अंकों से पास हो गए।ऐसे धार्मिक आस्था के केन्द्र बिंदु साहसी प्रतापी पुरुष योगी आदित्यनाथ जी,जिन्होंने संयोग बस केवल ठाना है,उत्तरप्रदेश के गौरव को,मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के राम-राज्य की अवधारणा को,धरातल पर पुनः प्रतिस्थापित करने के लिए।
निःसन्देह,श्री योगी जी मानवीय मूल्यों एवं वैश्विक स्तर पर भारतीय संस्कृति, धर्म और आस्था के केंद्र बिंदु में रहकर विवेकानंद सरीखे आध्यात्मिक गुरु के रूप में उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुम्भ की गरिमा से भारतीय संस्कृति के ध्वजवाहक हैं। वहीं,आध्यात्मिक,सांस्कृतिक एवं धार्मिक समागम के लिए आने वाले सहृदयी श्रद्धालुओं की मनवांछित आध्यात्मिक,सांस्कृतिक,धार्मिक यात्राओं के प्रयोजन के लिए उत्तरप्रदेश सरकार ने अभूतपूर्व व्यवस्था की है।यदि कहा जाए कि ऐसी उत्कृष्ट व्यवस्था,जो इस वर्ष 2025 के महाकुंभ में प्रयागराज में योगी जी के नेतृत्व में की गई है,वह न कभी हुई थी और आगे भी न होगी।

निष्कर्षत: कहा जा सकता है कि महाकुंभ मेला एक धार्मिक समागम से कहीं अधिक है; यह आस्था,अनुष्ठानों और आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जुड़ा एक जीवंत उत्सव है जो भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के सार को दर्शाता है।यह राष्ट्र की गहरी जड़ों वाले लोकाचार को गहराई से दर्शाता है,जो मानवता और परमात्मा के बीच स्थायी संबंध को प्रदर्शित करता है।पवित्र नदियों में पवित्र स्नान,उपवास,दान और भक्ति जैसे सदियों पुराने अनुष्ठानों के माध्यम से यह भव्य समागम यहां आने वाले भक्तों को मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।कुंभ मेले की परंपराए समय और स्थान की सीमाओं से अलग जाकर लाखों लोगों को उनकी पैतृक जड़ों और आध्यात्मिक मूल से जोड़ती हैं।यह एकता,करुणा और विश्वास के शाश्वत मूल्यों का एक जीवंत प्रमाण है जो समाज को एक सूत्र में बांधता है। साधु-संतों का भव्य जुलूस,गूंजते मंत्रोच्चार और नदियों के संगम पर किए जाने वाले पवित्र अनुष्ठान मेले को एक दिव्य अनुभव में बदल देते हैं जो हर भक्तों की आत्मा को छू जाता है।

( प्रयागराज से लौटकर )
हरेराम तिवारी ,वरिष्ठ पत्रकार रायगढ़

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