रायगढ़

उद्योगों के लिए होनेवाली पर्यावरणीय जन सुनवाई क्या है ?आम् लोगों को इसकी महत्ता की कितनी समझ और जानकारी है?

(अनिल पाण्डेय)किसी भी उद्योग ,खदान ,बांध की स्थापना जिसकी लागत सौ करोड़ से अधिक होती है(इस राशि में यदि कोई संशोधन हुआ है तो मुझे उसकी जानकारी नहीं है ) उसके लिए आयोजित पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए जन सुनवाई क्या होती है ?इस तरह की जनसुनवाई में किस मुद्दे पर आम् लोग अपना पक्ष रखते हैं , ? सम्बंधित संस्थान अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट में पर्यावरणीय रिपोर्ट का आमजन की जानकारी के लिए उसका प्रकाशन अखबारों में क्यों नहीं कराते ? इस बात को क्यों नही सामने लाया जाता कि इसका उस क्षेत्र के रहने वालों की संस्कृति ,रहन सहन ,पर्यावरण ,जैव विविधता ,उस क्षेत्र की वनस्पति ,कृषि ,पशु पक्षी ,पर क्या प्रभाव पड़ेगा ,जो कार्बन उत्सर्जन बढ़ेगा उस पर कैसे नियंत्रण पाया जाएगा ? स्थानीय लोगों को उसमें कितना रोजगार दिया जाएगा ,?विस्थापित होने वाले लोगों को विस्थान से पूर्व ,स्थापन की क्या योजना है ?संविधान की 5 वीं सूची में आने वाले क्षेत्र के लोगों के संविधान प्रदत्त अधिकारों का पालन हो रहा है या उसकी अवहेलना हो रही है ।*
जो भी लोग उद्योगों की स्थापना ,विस्तार के लिए होने वाली जनसुनवाई का समर्थन करते है उनमें से कितने लोग ऐसे होते हैं जिन्होंने ने इसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट का अध्ययन किया होता है ?उसमें से कितने लोग इसमें शामिल तकनीकी शब्दों के अर्थ को जानते और समझते हैं ?उसमें से कितने लोग पर्यावरण के विशेषज्ञ थे ? जबानी समर्थन और विरोध का क्या अर्थ है ?क्या यह सब बेमानी नहीं है ?
जनसुनवाईयों के पीछे का सच ?
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रायगढ़ में जब भी किसी उद्योग के विस्तारीकरण अथवा स्थापना के लिए जनसुनवाई होने वाली होती है तब इसके समर्थन और विरोध का खेल शुरू हो जाता।इन जनसुनवाई के पीछे का खेल भी निराला होता है ।यदि सबकुछ पहले से तय और पूर्वनिर्धारित होता है तो फिर इन जनसुनवाईयों का औचित्य महज कागजी खानापूर्ति तक रह जाता है ।एक ही प्रकार का पर्यावरणीय अध्यन की रिपोर्ट सब तरफ घूमती रहती है ,बस स्थान और नाम बदल दिए जाते हैं ।इसी तरह विरोध में कही जाने वाली बात की प्रकृति भी एक जैसी ही होती है ।
(अनिल पाण्डेय)

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