रायगढ़

शहर में‌ नववर्ष का उल्लास फीका न्यू ईयर ईव भी नहीं:हरेराम तिवारी

रायगढ़। नव वर्ष 2025 के आते ही हमारी खुशियों को न जाने कौन सा ग्रहण लग गया।जहां साल के आखिरी 2 दिन पूर्व से ही पुराने साल की बिदाई और नए साल के स्वागत का जश्न देखते ही बनता था,वहीं नववर्ष की पूर्व संध्या पर इस बार शहर में उल्लास और उत्साह की जगह फीकापन देखा गया।न्यू ईयर ईव के अवसर पर शहर के लोगों ने अपने घरों में ही रहना पसंद किया और बाहर जश्न मनाने के लिए नहीं निकले।यहां तक कि ख्यातिलब्ध सामाजिक संस्थाओ ने भी इस बार न्यू ईयर सेलिब्रेशन का कोई आयोजन नहीं किया,जिसका लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता था।
शहर के युवाओं ने भी इस बार नववर्ष का जश्न हर साल की तरह जोश ओ खरोश से नहीं मनाया।कई लोग तो घर परिवार के बीच ही मौजूद नजर आये और सोशल मीडिया पर नववर्ष की शुभकामनाएं दे रहे थे।शहर के पार्कों और गार्डनों में भी शाम को कोई ख़ास चहल पहल नजर नहीं आई।
शहरवासियों ने बताया कि इस बार नववर्ष का जश्न नहीं मनाने का कारण आर्थिक समस्याएं भी है।लोगों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है और वे नववर्ष का जश्न मनाने के लिए पैसे नहीं खर्च कर सकते हैं। इस प्रकार, शहर में नववर्ष का उल्लास फीका रहा और न्यू ईयर ईव भी नहीं मनाया गया।हांलांकि शहर के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि न्यू ईयर सेलिब्रेशन को लेकर शहर में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की तैनाती की गई है और लोगों को सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।हर साल की तरह इस बार भी नववर्ष की पूर्व संध्या पर शहर के लोगों को जश्न मनाने की उम्मीद थी,लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ था और दुकानें बंद थीं।लोग अपने घरों में ही थे और टीवी पर नववर्ष के कार्यक्रम देख रहे थे।

नववर्ष के जश्न को लेकर युवाओं मे भी मायूसी

नए साल के आगमन पर शहर के उद्योगपतियों युवाओं मे भी चमक कम मायूसी ज्यादा दिखी।नए साल के आगमन पर न तो थर्टी फर्स्ट,न ही नवनिशा,न कोई मनोरंजन,न कोई शोर शराबा,न कोई आतिशबाजी,न ही कोई चहल पहल और न ही कहीं किसी की पूंछ परख!आखिर सब कुछ तो ठीक चल रहा फिर भी वातावरण मे इतना नीरसपन! समझ से परे है। सूत्रों से पता चला है कि इस बार उत्साह और मानसिक मनोरंजन के बिकाऊ प्रॉडक्ट की सेल मे भी कोई इज़ाफ़ा नहीं हुआ।शहर के कतिपय निवासियों ने तो अपनी बात रखते हुए कहा कि इस बार नववर्ष का धूमधाम के साथ जश्न नहीं मनाने का कारण प्रदूषण एवं मौसम जन्य बीमारियों का प्रकोप भी हो सकता है? इसके अलावा,शहर के निवासियों ने बताया कि इस बार नववर्ष का जश्न नहीं मनाने का कारण आर्थिक स्थिति भी हो सकती हैऔर वे नववर्ष का जश्न मनाने के लिए पैसे खर्च करना नहीं चाहते हों ?
इस प्रकार शहर में नववर्ष का जश्न नहीं मनाने के कई कारण हैं।बहर हाल लोगों मे नए साल के जश्न की संकीर्णता के पीछे चाहे जो भी मसला हो,निश्चित रूप से यह विचारणीय प्रश्न है।आम लोगों का नजरिया महज आत्मसंतुष्टि से ज्यादा नहीं।अभी भी लोगों को उम्मीद है कि अगले साल नववर्ष का जश्न फिर से मनाया जाएगा और शहर में खुशियों का माहौल होगा।

हरेराम तिवारी ,वरिष्ठ पत्रकार

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