रायगढ़

चक्रधर समारोह के वो रसिक ,गुणी और जानकार दर्शक

रायगढ़।बात उस दौर की है जब मैं चक्रधर समारोह की रिपोर्टिंग करने के लिए जाया करता था ,वहां पर प्रेस दीर्घा में ना बैठकर आम दर्शकों के बीच यह जानने और देखने के लिए बैठा करता था कि शास्त्रीय नृत्य और संगीत को देख सुनकर दर्शक कैसी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।कलम डायरी तो साथ हुआ करती थी जो देखता सुनता था उसे नोट कर लिया करता था ।

चक्रधर समारोह में हमेशा मेरी नजर उन लोगों को ढूंढा करती थी जो कुर्ता धोती पहनकर गले में गमछा डालकर पुसौर और सरिया की तरफ से आया करते थे ।ये लोग आम दर्शक दीर्घा में बैठा करते थे। मैं भी इन्ही लोगों के आसपास बैठ जाता था ।सरिया, पुसौर की तरफ से आये ये लोग शास्त्रीय संगीत और नृत्य के रसिक होने के साथ साथ जानकार भी हुआ करते थे ,इस तरह की प्रस्तुति के बीच ये लोग प्रस्तुति के बारे में उड़िया और हिंदी में आपस में चर्चा भी करते थे तथा उसके गुणदोष का विवेचन भी करते थे ।मैं उनकी बातों को अपनी डायरी में नोट कर लिया करता था ,जो समझ में नहीं आता था उसे पूछ लिया करता था जिसके कारण विषय के अनुकूल एक पूरी रिपोर्टिंग तैयार हो जाया करती थी।(अनिल पाण्डेय)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button