रायगढ़
डंडा नृत्य होली के पहले से शुरु होकर होली के अंतिम दिन तक होता है।

रायगढ़ ।रायगढ़ जिले के ग्रामीण अंचलों में होली से पहले छेरछेरा त्योहार के अवसर से डंडा नृत्य का प्राम्भ हो जाया करता है और यह नृत्य होली के अंतिम दिन तक किया जाता है । आज छेरछेरा के दिन भी कई ग्रामीण इलाकों में डंडा नाच खेला जा रहा है।
जिले के पुसौर क्षेत्र में फाल्गुन माह में होली के कुछ दिन पहले से डंडा नृत्य प्रारंभ कर होली के दिन अंतिम किया जाता है इसी दिन सभी रंग गुलाल खेलकर हर्षोल्लास से डंडा को विर्सजन कर दिया जाता है। इस अवसर पर कृष्ण के रासलीला के गीत एवं पुसौर का प्रसिद्ध रामलीला के रामजानकी वन विहार का गीतों को गाकर डंडा नृत्य किया जाता है। यह डंडा नृत्य 4 व्यक्ति से 24 या इससे अधिक व्यक्तियों के समूह में किया जाता है। डंडा नृत्य के विभिन्न प्रकार भी हैं… जो विभिन्न स्टेप में किया जाता है..
- पानधारी- पहले जब महिलाओं के द्वारा पानी एक कतार बद्ध से लाया जाता था उसे ही प्रदर्शित करता है।
- माढ़ेल- इसमें गोल घेरा बनाकर नृत्य किया जाता है।
- दो डंडा- इसमें दो व्यक्तियों को पार कर तीसरे व्यक्ति से डंडा मिलाया है।
- तीन डंडा – इसमें तीन व्यक्तियों को पार कर चोथे व्यक्ति से डंडा मिलाया जाता है।



