सत्यम’ने रायगढ़ के गौरीशंकर मन्दिर में चित्रों से उकेरी पौराणिक गाथाएं

रायगढ़ । नृत्य ,संगीत ,कला ,साहित्य ,सँस्कृति की नगरी रायगढ़ , इन क्षेत्रों में मिली ख्याति के कारण पूरे देश मे प्रसिद्ध है और इसी के कारण रायगढ़ का नाम आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है ।दान और धर्म के क्षेत्र में भी रायगढ़ की जहां अपनी एक विशिष्ट पहचान है तो रायगढ़ का प्रसिद्ध और भव्य गौरीशंकर मंदिर, मंदिरों के क्षेत्र में भी रायगढ़ को अनोखी पहचान और स्थान दिलाता है ।जब हम गौरीशंकर मंदिर की बात करते हैं ,उसकी सुंदरता और भव्यता की चर्चा करते है तो हमारा ध्यान इस मंदिर के अंदर दीवालों पर लगी पौराणिक गाथा वाली पेंटिंगों के ऊपर जाता है ।इनमें से प्रत्येक पेंटिंग एक पूरी पौराणिक कहानी को बताता हुआ सुनाता हुआ प्रतीत होता है ।ये पेंटिंग देखने वाले को इस कदर आकर्षित करती हैं कि वो इन्हें मंत्रमुग्ध होकर इसे देखते हुए इन्ही में खो जाता है और उसे एक सुखद अनुभूति का अहसास होता है ।गौरीशंकर मंदिर की भव्यता ,सुंदरता और वहां पर स्थापित मूर्तियों की कलात्मकता की चर्चा होती है तो वहां पर लगी पेंटिंगों की चर्चा होना लाजिमी हो जाता है ।गौरीशंकर मंदिर में लगे पेंटिंगों की कलात्मकता ,कथात्मकता में जब हम खो जाते है तो हमारा ध्यान इस पेंटिंग को बनाने वाले कलाकार की तरफ भी जाता है है कि उसने कितना परिश्रम करके पूरी तरह एकाग्रचित होकर कथानक में डूब कर इन पेंटिंगों को बनाया होगा ? इसलिए इन पेंटिंगों को बनाने वाले कलाकार से भी आपका परिचय कराना मुझे आवश्यक जान पड़ता है।दक्षिण भारत से आये चित्रकार ‘सत्यम ‘ने गौरीशंकर मंदिर की दीवालों पर अपनी तूलिका से पौराणिक गाथाओं को कहने वाली इन पेंटिंगों में लगभग 70 -72 साल पहले रंग भरा था जो आज भी जीवंत लगते हैं और अपनी अनुपम प्रभा बिखेरते हैं ।इन पेंटिंगों को बनाने वाले सत्यम का नाम पेंटिंग के नीचे तरफ एक कोने में उकेरा हुआ भी दिखाई देता है। *पी एस खोडियार सर की जुबानी सत्यम की कहानी ** सत्यम के सम्बंध में और उनकी चित्रकला के बारे मेंअधिक जानकारी के लिए मुझे नटवर हाई स्कूल में पढ़ाने वाले श्री पी एस खोडियार सर जो कि खुद एक ख्याति लब्ध चित्रकार है से मैने जब सम्पर्क किया तो श्री खोडियार सर ने सत्यम के बारे में बताते हुए कहा कि सत्यम बहुत ही उच्च कोटि के पोट्रेट आर्टिस्ट थे और वे अपना सारा पेंटिंग वर्क ऑयल पेंट से किया करते थे।श्री खोडियार सर ने बताया कि वो जब एडवर्ड स्कूल में कक्षा तीसरी में पढ़ा करते थे तो अक्सर स्कूल से गौरीशंकर मंदिर चले जाया करते थे और वहां पर मचान पर बैठकर सत्यम को पेंटिंग करते हुए देखा करते थे ,कभी कभी उन्हें रंग ब्रश भी पकड़ाया करता था ,सत्यम काफी सिगरेट पिया करते थे ।श्री खोडियार सर ने कहा कि एडवर्ड स्कूल के गुरुजी राममूर्ति जी सत्यम के शागिर्द थे वो भी शाम को जब मंदिर आते थे तो मुझे वहां देखते थे जिसके बाद मैं वहां से चला जाया करता था ,पर राममूर्ति गुरु जी यह जानते थे कि मैं वहाँ पर स्कूल छोड़कर सत्यम को पेंटिंग बनाते हुए देखने के लिए ही आता हूँ।श्री खोडियार सर ने कहा कि सत्यम ने गौरीशंकर मंदिर में सारी पेंटिंग उनकी आंखों के सामने बनाई है ।उन्होंने कहा कि सत्यम ने वहां पर जो पौराणिक गाथाओं वाली पेंटिंग बनाई है दरअसल में वो राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई पेंटिंगों की प्रतिकृति है ।*राजा रवि वर्मा *****श्री खोडियार सर ने जब राजा रवि वर्मा का जिक्र किया है तो उनके बारे में बताना जरूरी लगता है ।प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार राजा रवि वर्मा का जन्म तिरुवनंतपुरम से 25 किलोमीटर दूर किलिमनूर पैलेस में वर्ष 1843 में हुआ था। राजा रवि वर्मा इंडियन ऑयल आर्ट की दुनिया के महानतम कलाकारों में से एक थे। उन्होंने वर्ष 1873 में वियना कला प्रदर्शनी में पहला पुरस्कार जीता, और अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा प्राप्त की। रवि वर्मा के चित्रों के विषय भारतीय महाकाव्यों के दृश्य थे, जिनमें रामायण , महाभारत और भारत की किंवदंतियों जैसे राजा नल और दमयंती की कहानी आदि जैसी कथाएं शामिल हैं



