रायगढ़, 21 अगस्त 2026। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने आज शुक्रवार को खरसिया विकासखंड के विभिन्न ग्रामों एवं सेवा सहकारी समितियों का भ्रमण कर ई-गिरदावरी (डीसीएस-डिजिटल क्रॉप सर्वे) कार्य का मैदानी निरीक्षण किया। उन्होंने ग्राम डोमनारा, तहसील खरसिया में पहुंचकर खेतों में चल रहे डिजिटल फसल सर्वे की स्थिति का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों एवं सर्वेयरों से सर्वे कार्य की प्रगति, प्रक्रिया और मैदानी स्तर पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। इस दौरान खरसिया एसडीएम श्री प्रवीण भगत, तहसीलदार एवं राजस्व अमला उपस्थित रहा। कलेक्टर ने चपले स्थित सेवा सहकारी समिति में आयोजित बकेट क्लेम पंजीयन शिविर का भी निरीक्षण किया।
छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी निर्देशों तथा आयुक्त, भू-अभिलेख छत्तीसगढ़, नवा रायपुर अटल नगर के दिशा-निर्देशों के तहत जिले में शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित ई-गिरदावरी का कार्य कराया जा रहा है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के परिपालन में फसल गिरदावरी कार्य में विशेष सावधानी एवं पारदर्शिता बरतने के निर्देश हैं।
(पीएसएस) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए फसल गिरदावरी की शुद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से जिले के सात विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले 105 धान उपार्जन केंद्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के ग्रामों में ई-गिरदावरी कार्य की सतत निगरानी करते हुए शत-प्रतिशत एवं त्रुटिरहित सर्वे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है
निरीक्षण के दौरान बताया गया कि डिजिटल क्रॉप सर्वे का कार्य 17 अगस्त से 20 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। सर्वेयरों द्वारा मोबाइल एप के माध्यम से खेतों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति के आधार पर फसल की जानकारी दर्ज की जा रही है। सर्वे के दौरान तालाब, मेड़, पड़ती, खलिहान तथा अन्य फसलों को चिन्हित करते हुए वास्तविक फसल रकबे का सही निर्धारण किया जा रहा है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों का पालन करते हुए मौके पर जाकर फसल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को सर्वेयरों की कम से कम एक बार समीक्षा बैठक आयोजित करने, योजनाबद्ध तरीके से आकस्मिक निरीक्षण कर गिरदावरी कार्य का भौतिक सत्यापन करने तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि अथवा विसंगति पाए जाने पर तत्काल संबंधित अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं उच्च अधिकारियों को अवगत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि ई-गिरदावरी का कार्य शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाए।
कलेक्टर ने जिला स्तरीय अधिकारियों को अपने आवंटित क्षेत्रों में नियमित रूप से मैदानी भ्रमण कर सर्वे कार्य की प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। सभी अधिकारियों को सप्ताह में कम से कम एक दिन ग्रामों का फील्ड विजिट करने तथा सर्वेयरों से व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखने को कहा गया है। फील्ड में आने वाली तकनीकी अथवा अन्य समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रत्येक सप्ताह निर्धारित प्रारूप में ई-गिरदावरी एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रगति रिपोर्ट भू-अभिलेख शाखा में जमा कराई जाएगी। सर्वे के दौरान अफीम सहित किसी भी प्रतिबंधित अथवा अवैध फसल की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि सर्वे कार्य में दर्ज प्रत्येक जानकारी वास्तविक एवं सटीक होनी चाहिए तथा किसी भी प्रकार की गलत प्रविष्टि या लापरवाही नहीं होनी चाहिए। पूरे कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शुद्धता बनाए रखने के लिए नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) का प्रमुख उद्देश्य खेत में बोई गई वास्तविक फसल एवं उसके रकबे की सही जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज करना है। इससे धान खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी तथा गलत जानकारी के आधार पर होने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। सर्वेयर मोबाइल एप के माध्यम से खेत में पहुंचकर मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन करेंगे। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फसल, रकबा, तालाब, मेड़, पड़ती, खलिहान एवं अन्य फसलों को अलग-अलग चिन्हित कर सही जानकारी दर्ज की जाएगी।
जिले के सात विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले 105 धान उपार्जन केंद्रों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों को संबंधित उपार्जन केंद्रों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में ई-गिरदावरी कार्य की सतत निगरानी एवं शत-प्रतिशत पूर्णता की जिम्मेदारी दी गई है। नोडल अधिकारी सर्वेयरों के साथ नियमित संपर्क रखेंगे, फील्ड में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और गिरदावरी कार्य का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करेंगे। प्रत्येक सप्ताह सर्वे की प्रगति की रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत की जाएगी। किसी भी प्रकार की त्रुटि, विसंगति अथवा अवैध फसल की जानकारी मिलने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाएगा।



