रायगढ़ 1 अगस्त ।रायगढ़ में इस साल गौरीशंकर मंदिर के श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की छटा निराली होगी। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को पहली बार भगवान शिव और माता पार्वती के परिक्रमा करते श्री गणेश और कार्तिकेय की नयाभिराम झांकी नजर आयेंगी। इसके अलावा गणेश विवाह, श्री राम और श्री कृष्ण लीला की झांकियां भी उन्हें अपनी ओर आकर्षित करेंगी। इसके लिए गौरीशंकर मंदिर में तैयारियां शुरू कर दी गई है।
रायगढ़ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व हर साल हर्षाेल्लास के साथ मनाया जाता है। इस साल भी 4 सितंबर को श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाने के लिए यहां युद्धस्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। यहां गौरीशंकर मंदिर में होने वाला उत्सव बहुत खास होता है। इसके साथ ही यहां लगने वाला मेला देशभर में प्रसिद्ध है. मथुरा के बाद छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में लगने वाले मेले को ही सबसे प्रसिद्ध माना जाता है। इस साल भी यहां श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। खास बात यह है कि इस बार यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भगवान शिव और माता पार्वती के परिक्रमा करते श्री गणेश और कार्तिकेय की नयाभिराम झांकी के दर्शन होंगे। वहीं पहली बार यहां नयाभिराम स्वचलित झांकियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करेंगी। मथुरा के बाद छत्तीसगढ़ का रायगढ़ ही ऐसा शहर है, जहां जन्माष्टमी पर मेला लगता था और मेले में शामिल होने के लिए पूरे छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्य के लोग भी आते हैं। हर साल जन्माष्टमी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. इसके साथ ही पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी यहां लोग मेला देखने आते हैं।
झूलोत्सव के नाम से गौरीशंकर मन्दिर में जन्माष्टमी मनाए जाने की परंपरा 1951 में प्रारम्भ हुई थी ।इसके पीछे स्व सेठ किरोड़ीमल की सोच यह थी कि रायगढ़ में भी जन्माष्टमी मथुरा की तर्ज पर मनायी जाए और हुआ भी ऐसा रायगढ़ में मनायी जाने वाली जन्माष्टमी दूर -दूर तक प्रसिद्ध हो गई और इसे देखने के लिए आसपास के लोगों के अलावा दूसरे राज्यों के लोग भी आने लगे और रायगढ़ में जन्माष्टमी के अवसर पर भारी भीड़ उमड़ने लगी जिसने कि एक मेले का रूप धारण कर लिया ।1955 से जन्माष्टमी मेला के अवसर पर रायगढ़ में सर्कस और मीना बाजार लगने के अलावा बाहर से व्यापारी आकर मेले में अपनी दुकान सजाने लगे ।
रायगढ़ में जन्माष्टमी मेले के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को लाने लेजाने के लिए रेलवे द्वारा जहां स्पेशल ट्रेन चलाई जाती थी तो राज्य परिवहन निगम भी अतिरिक्त बसें मेला स्पेशल के रूप चलाया जाता था ।इस दौरान रायगढ़ के सिनेमा घरों द्वारा धार्मिक फ़िल्म लगाई जाती थी और कई शो चलाये जाते थे ।कहा जाता है कि जन्माष्टमी मेला के दौरान रायगढ़ में कोई घर नहीं बचता था जो मेहमानों से भरा नहीं होता था ,यहां तक कि अनजान लोग भी घरों के बाहर की परछी में अनजान लोग भी डेरा जमा लिया करते थे और उनका भी पूरा ध्यान घर के लोग रखा करते थे ।
जन्माष्टमी मेले के दौरान रायगढ़ में जगह -जगह भोजन ,पानी ,नाश्ते की व्यवस्था रायगढ़ की सेवाभावी संस्थाए किया करती थी और अब भी किया करती हैं ।रायगढ़ के लोगों द्वारा सेवा और सत्कार करना रायगढ़ की वर्षों पुरानी संस्कृति है।



