पिछले 40 साल से पत्रकारिता में हूँ ,भले ही एक छोटे से शहर में छोटे अखबारों से जुड़कर ही पत्रकारिता की है लेकिन इस दौर में मिशन मोड की पत्रकारिता को व्यावसायिक पत्रकारिता में बदलते देखा है ,पत्रकारिता के नए रंग ,बदलते स्वरूप और संसाधनों को देखा है ,प्रिंट से इलेक्ट्रॉनिक चैनलों तक के सफर को नजदीक से देखा और उनका अनुभव भी प्राप्त किया । आठ साल पहले हाथ में साधरण मोबाइल और माइक लेकर सड़क पर उतर कर भी रिपोर्टिंग की है ,और आज भी करता हूँ ।
अब इस दौर में मीडिया के क्षेत्र में नई क्रांति का सूत्रपात हो चुका है जिससे मेन स्ट्रीम का मीडिया घराने का दम्भ ,घमंड टूटने लगा है ।अब नागरिक भी हाथ में मोबाइल और माइक लेकर नागरिक पत्रकारिता कर रहे हैं ,वीडियो बनाकर सोशल साइट पर खबरें परोस रहे हैं जिसके चलते आम लोग अब खबरों के लिए मेन स्ट्रीम की मीडिया के मोहताज नहीं रह गए हैं ।हाथ में मोबाइल और माइक लेकर पत्रकारिता करने वालों के पास भले ही संसाधन सीमित हों ,उनके खबरों के स्रोत कम क्यों ना हो इसके बावजूद वो अपना काम पूरी ईमानदारी और मेहनत से कर रहे हैं ।इसमें अधिकतर वो लोग शामिल हैं जिन्हें उनके मीडिया संस्थानों से नोकरी से बाहर कर दिया गया है ,पत्रकारिता की डिग्री लेने वाले वो छात्र भी शामिल हैं जिन्हें नोकरी नहीं मिल पाई है , पत्रकारिता की नोकरी से रिटायर्ड लोग भी शामिल हैं ।इस तरह यह कहा जा सकता है कि सोशल मंच पर पत्रकारिता करने वालों में अनुभवी ,प्रशिक्षित ,मेहनती लोगों की कमी नहीं है जिन्होंने पत्रकारिता का झंडा बुलंद कर रखा है । नागरिक पत्रकार होने के लिए अब यह जरूरी बिल्कुल भी नहीं रह गया है कि उसके गले में किसी मीडिया संस्थान का पहचान पत्र टँगा हो? इस तरह अब पत्रकारिता मीडिया घरानों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि उसके घेरे और दायरे को तोड़कर बहुत आगे तक निकल गई है।
सोशल मंच पर होने वाली पत्रकारिता मीडिया संस्थानों को भारी पड़ने लगी है उनके विज्ञापनों में कमी आने का दौर शुरू हो चुका है ।
सोशल मंच अब सिर्फ राजनीति का मैदान ही नही बल्कि खबरों का मंच और मैदान भी बन चुका है जोकि मेन स्ट्रीम मीडिया कहे जाने वालों के लिए एक बड़ी चुनोती है।



